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Showing posts from July, 2008

हमसे पूछो न दोस्ती का सिला

वे दोनों दोस्त नहीं थे लेकिन दोस्त की तरह दिखते थे. एक उम्र में कुछ बडा था और दूसरा उम्र में कुछ छोटा. उम्र की ही तरह समझदारी में भी कमीबेसी उसी आयतन में थी. उन दोनों ने दोस्ती दिखाना एक कला की तरह शुरू किया था, जो हमारे समय में आम पाई जाती है. आपके आसपास भी ऐसे कई चेहरे होंगे जो दोस्त की तरह दिखाई देते होंगे, लेकिन एक दिन अचानक पता चलता है कि उन्होंने दोस्ती के झूठ को गुब्बारे की तरह फुला रखा था, जिसकी हवा वे लगातार चैक करते रहते थे. हालांकि हमारी बातचीत के बीच जिनका जिक्र है वे अब भी कामयाबी से अपने चेहरे पर दोस्ती चस्पां किए हुए हैं. इस बीच कई बार हवा कुछ कम हुई और गुब्बारा पिचका लेकिन फिर उन दोनों ने उसे पहले की तरह दुरुस्त कर लिया.. मैं उनके बारे में कुछ नहीं बताता अगर हाल ही में उनके हिस्से की कुछ मजेदार कतरनें, जिन्हें आप सुविधानुसार कुछ भी नाम दे सकते हैं, मेरे पास न आती हुआ यूं कि एक बार रात में छोटे वाले से मेरी मुलाकात हुई. मैं सडक पर अकेला चला जा रहा था सो वक्त काटने के लिए मैंने उससे बातचीत शुरू कर दी. चूंकि एक से बातचीत में दूसरे का और दूसरे से बातचीत में पहले का जिक्र ह…

नमस्कार, सर

वह एक विवेकपूर्ण नमस्कार था
जिसे मैंने ऑफिस की सीढियां चढते
हुए थोडा थोडा खर्च किया
इसके बदले में कई बार मुझे एक मुस्कुराहट मिली कई बार उठा हुआ सीने तक जाता हाथ
पर मेरे लिए इनका कोई मतलब नहीं था
नमस्कार मेरे पास बहुत से थे
सो उनके खर्च में कंजूसी का कोई बहुत मतलब नहीं था

लांग टर्म बेनिफिट इनका मिलना ही था
ये नमस्कार अभी के अभी नहीं बदल जाते मिल्कियत में
सिगरेट की तरह नहीं होते नमस्कार
कि दोस्त तुम्हारी जेबों से निकाल ले पूरा पैकेट और तुम्हें नाराज करके भी लगाता रहे लंबे लंबे कश
हालांकि यह दीगर बात कि बाद में दोस्त की यह हरकत आपके चेहरे पर हंसी ला देती है
जिसे आप यादों से निकले एक खूबसूरत दृश्य की हंसी का नाम दे सकते हैं
खैर यह किस्सा कुछ और है
और मार्के की बात यह कि अभी नमस्कारों ने फिर अपने रंग बदलना शुरू कर दिए हैं
जिन्हें कभी हम नमस्कार करते थे वे अब खुद पहले हाथ मिलाने के लिए आगे आने लगे हैं
जो महज चश्में के ऊपर से झांकते थे वे मुंडी हिलाने लगे हैं
और जो अपनी कुर्सी से खडे हो जाते थे
अब झुकने लगे हैं
यह वही दौर है
जब दुश्मन को सीधे सीधे हुंकारा भरकर नहीं ललकारा जाता
अब जड से उखाडने के लिए नींव टटोली ज…