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हबीब दा से आखिरी बातचीत

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वालिद की वसीयत पूरी करने का सुकून
यकीनन पहाड़ टूटा है। हकीकत इतनी ही ठोस और बेरहम होती है। सोमवार की सुबह सूरज अंधियारा लेकर उगा था। हबीब साहब के इंतकाल के बाद वक्त थम गया। हंसी रुक गई। उम्मीद ठहर गई। अंधेरा छटा तो हौसला मुस्कुराया, कि लोक की आस्था में रची आवाज कभी थम नहीं सकती, उम्मीद से भरे सीने की धड़कन कभी नहीं रुकती, सपनों से भरी आंखें कभी नहीं बुझतीं। एक दिल की धड़कन थमी, तो हमारे हबीब लाखों दिलों में धड़कने लगे...
हबीब दा के वालिद युसुफ जई कबीले के थे। तनवीर तखल्लुस की जरूरत उन्हें शायरी करते हुए पड़ी। बाबा ने नाम रखा था हबीब अहमद। इस तरह पूरा नाम बनता था- हबीब अहमद युसुफजई खान तनवीर।
अब वे इस दुनिया में नहीं हैं। अपने आखिरी वक्त तक हबीब दा ऊर्जा से भरपूर थे। उन्हें अपनी सीमाओं का ख्याल था, लेकिन इस वजह से कभी अपनी इच्छाओं को नहीं रोका। वे लगातार काम करते रहे। थियेटर के लिए, आर्ट के लिए, लोक के लिए। थकान उन्हें कभी नहीं रही। हाल ही में हबीब दा से मुलाकात हुई। तो जिक्र निकला इच्छाओं का। उन्होंने एक जरूरी इच्छा पूरी होने और एक इच्छा पूरी न होने की याद साझा की। हबीब दा के वालिद चाहते थे…

इज इट पॉसिबल फॉर एनी वन ..?

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मौतकईलोगोंकेलिएएकसूचनाभरहोतीहै. तिलतिलकरमरते, हररोजजीनेकीजद्दोजहदमेंमशगूललोगोंकेलिएयहअंतभीहै. फिरभीयहदुखसेभरजातीहै. क्योंकि मौत के साथ सपना देखने वाली आंखें भी बुझ जाती हैं. कुलदीपनारायणमंजरवेजीकेनरहनेकादुखभीइन्हीबहुतसेदुखोंकेबीचसेझांकताएकबडाऔरसहमाहुआसचहै. अबउनकेहाथकुछनहींरचेंगे. उनकीमौतकीसूचनानिरालानेदी. कुलदीपजीकीमौतसेविचलितनिरालानेअपनादुखकागजसेकहाऔरमेलकरदिया. मैंकुलदीपजीसेकभीनहींमिला. बातचीतमेंकईबारजिक्रआया, लेकिनवहअनायासचलेआनेवालेनामोंकेक्रमकाहिस्साहीरहा. अफसोसमैंइसशख्सियतकेकभीरूबरूनहींहोसका. जिनसेकलाकोगढा, जीवनकोभी.
मुझे गाजे-बाजे के साथ विदा करना,
लगे कि कलाकार का जनाजा है, ऐरे-गैरे का नहीं...
निराला तिवारी
वह रविवार 31 मई की शाम थी. महीने का आखिरी दिन. मन यूं ही इधर-उधर भटक रहा था. लेकिन नहीं पता था कि यह मेरे आत्मीय और समाज-दुनिया से उपेक्षित एक महान कलाकार के जीवन का भी आखिरी दिन था. शाम को एक अजीज मित्र को मैसेज भेजा- आई वांट टू लीव फुल्ली, सो आई कैन डाई हैप्पी... इज इट पॉसिबल फॉर एनी वन डियर...?
अभी यह मैसेज भेज कर मित्र से मिलने वाले जवाब की प्रतीक्षा कर ही रहा था कि रात नौ ब…