April 19, 2017

पैदाइश पर पाबंदी : समस्या के हल से उभरती समस्याएं

सचिन श्रीवास्तव
असम सरकार की नई जनसंख्या नीति का जो मसौदा पेश किया है, वह चर्चा में है। इसके मुताबिक, दो से ज्यादा बच्चे होने पर माता-पिता सरकारी नौकरी नहीं कर सकेंगे। साथ ही उन्हें न तो आवास योजनाओं का लाभ मिलेगा और न ही वे स्थानीय निकायों के चुनाव लड़ सकेंगे। जनसंख्या को काबू में करने के लिए ऐसे प्रतिबंधों का यह अनूठा मामला नहीं है। दुनिया के कई देश समय-समय पर ऐसी पांबदियां लगाते रहे हैं। दूसरी तरफ ऐसे मामलों की भी कमी नहीं है, जो ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए विभिन्न प्रलोभन देने की मिसालें बने हैं। दिक्कत यह है जनसंख्या जब समस्या बनती है, तो उसे हल करने के लिए उपाय सामने लाए जाते हैं, उनसे नई समस्याएं उभरती हैं, और सरकारों को फिर पुरानी नीतियां
अपनानी पड़ती हैं।
भारत
2022
तक भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा
06 साल पहले आबादी में पहले स्थान पर पहुंच जाएगा भारत, संयुक्त राष्ट्र के 2013 में लगाए गए अनुमान से

प्रतिबंध लगाने वाले देश
चीन: एक से दो बच्चे की नीति तक

बच्चों की पैदाइश पर प्रतिबंध संबंधी नीतियों में चीन का मामला सबसे चर्चित रहा है। 1970 के दशक के उत्तरार्ध में आबादी के बोझ से आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त होने के चलते चीन ने एक बच्चे की नीति लागू की। इस दौरान सजा के साथ जबरन गर्भपात की घटनाएं भी सामने आईं। 2013 में चीन ने ऐसे जोड़ों को दो बच्चे पैदा करने की इजाजत दी, जिनमें से कम से कम एक अपने मां-बाप की इकलौती संतान हो। 2015 में देश में बुजुर्गों की संख्या बढऩे और आबादी असंतुलन की आशंका के चलते इस नियम से सभी शर्तें हटा ली गईं और सभी के लिए दो बच्चों की नीति लागू कर दी गई।

ईरान: ज्यादा से कम, और फिर ज्यादा
1979 की क्रांति के बाद ईरान ने नागरिकों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन 1988 में ईराक से आठ साल लंबी लड़ाई के बाद आर्थिक मंदी की आशंका के चलते दो बच्चों के परिवार पर जोर देना शुरू किया। एक दशक पहले तत्कालीन राष्ट्रपति मेहमूद अहदमीनेजाद ने इस नीति को बदल दिया। उनका कहना था कि हम 12 करोड़ लोगों का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं, इसलिए पाबंदी की कोई जरूरत नहीं।

वियतनाम: नीति में बदलाव की तैयारी
बीती सदी के सातवें दशक में उत्तरी वियतनाम में दो या तीन बच्चों की नीति का सख्ती से पालन किया गया। यह सिलसिला आठवें दशक में एकीकृत वियतनाम के दौर तक जारी रहा। फिलहाल वियतनाम में दो बच्चों की नीति है, लेकिन कम्यूनिस्ट सरकार इस नीति को बदलने के बारे में विचार कर रही है।

ये देश चाहते हैं ज्यादा पैदाइश
दक्षिण कोरिया:
पूरी दुनिया में जन्मदर के मामले में सबसे पीछे। २०१० में महीने के तीसरे बुधवार को शाम ७.३० के बाद ऑफिस बंद करने का नियम चर्चा में रहा। ताकि कर्मचारी जल्दी घर जा सकें। बच्चों की परवरिश के लिए कई सुविधाएं भी दे रहा है यह देश।
सिंगापुर: सिंगापुर ज्यादा बच्चे पैदा करने से संबंधित नीतियों पर सालाना १.३ बिलियन डॉलर (करीब ८८ अरब रुपए ) खर्च करता है। टैक्स में छूट और मातृत्व अवकाश बढ़ाने संबंधी नियम भी हैं।
तुर्की: २०१६ में राष्ट्रपति रेसिप तायिप ने महिलाओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया। इससे पहले २०१५ में ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले जोड़ों के लिए अतिरिक्त सुविधाओं की भी घोषणा की जा चुकी थी।
जापान: २०१५ में जापान की जन्मदर १.४६ प्रतिशत रही, जो बीते दो दशक में सबसे ज्यादा थी। पूरी दुनिया में बूढ़ों के देश के तमगे को हटाने के लिए जापान कई योजनाएं चला रहा है, इनमें पहले बच्चे की पैदाइश पर करीब १.१० लाख रुपए की राशि शामिल है।
फ्रांस: यूरोप में सबसे ज्यादा जन्मदर २.०१ होने के बावजूद परिवार बढ़ाने को प्रोत्साहन दे रहा है। २०१४ में अपने बजट का कुल २.६ प्रतिशत हिस्सा परिवारों की देखभाल पर खर्च किया।

अफ्रीकी देशों में जन्मदर ज्यादा
सबसे ज्यादा जन्मदर
देश        प्रति 1000 पर जन्मदर

निगार              7.6
सोमालिया        6.5
माली                6.2
चाड                  6.2
अंगोला             6.2
कांगो                6.0
बुरुंडी                5.9
युगांडा              5.8
गाम्बिया         5.7
नाइजीरिया       5.7

सबसे कम जन्मदर
1.2 है दक्षिण कोरिया, पुर्तगाल, हांगकांग और मकाऊ में प्रति 1000 लोगों पर जन्मदर
1.3 की जन्मदर है सिंगापुर, मोलदोवा, बोस्निया, स्पेन, पौलेंड और ग्रीस में

ब्रिक्स देशों में भारत और दक्षिण अफ्रीका आगे
देश                          जन्मदर
भारत                       2.4
दक्षिण अफ्रीका         2.4
ब्राजील                     1.8
रूस                          1.7
चीन                         1.6
स्रोत: विश्व बैंक

संभावना
2050 तक दुनिया की आबादी 9.7 अरब होने के आसार
साल        दुनिया की आबादी
2015        7.35 अरब
2020        7.76 अरब
2030        8.5 अरब
2040        9.16 अरब
2050        9.73 अरब
स्रोत: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या विभाग
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