February 23, 2018

मुख्य सचिव-विधायक विवाद पर हमलावर हुई आम आदमी पार्टी

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राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल ने भाजपा नेताओं के अधिकारियों पर किए गए हमलों पर किए कई ट्वीट


भोपाल, 23 फरवरी। आम आदमी पार्टी के विधायकों और मुख्य सचिव के बीच हुए विवाद की आग थमती नहीं दिखाई दे रही है। दिलचस्प यह है कि अब आम आदमी पार्टी इस मामले में हमलावर नजर आ रही है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मध्य प्रदेश के संयोजक आलोक अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर भाजपा के नेताओं के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। श्री अग्रवाल ने शुक्रवार को एक के बाद एक पांच ट्वीट किए और भाजपा नेताओं के अधिकारियों पर हमले को सामने लाए।

पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, "शिवराज सिंह ने अधिकारियों को अभद्र धमकी दी थी कि यदि काम पूरा नहीं हुआ तो उल्टा टांग दूंगा।
यह तो सार्वजनिक बोला था निजी रूप से कैसे पेश आते हैं सबको पता है। किसी अधिकारी ने इसकी खिलाफत नहीं कि, क्या उल्टा टंगने का डर था?" गौरतलब है कि बीते 22 जुलाई 2017 को एक बैठक के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टरों को यह धमकी दी थी, जो उस वक्त अखबारों की सुर्खियां बनी थी।
https://twitter.com/iAlokAgarwal/status/966860307833544710

इसके बाद एक अन्य ट्वीट में उन्होंने सतना के भाजपा सांसद गणेश सिंह को निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा, "मध्य प्रदेश के भाजपा सांसद गणेश सिंह ने मुंबई पुलिस अधिकारी को तमाचा मारा था, न सांसद महोदय पर कार्रवाई हुई और न ही किसी अधिकारी/एसोसिएशन ने आवाज उठाई। क्या भाजपा वालों को सारे खून माफ हैं?" इस घटना से जुड़ा वीडियो भी श्री अग्रवाल ने पोस्ट किया है।
https://twitter.com/iAlokAgarwal/status/966862229516759040

इतना ही नहीं मध्य प्रदेश के एक और कद्दावर मंत्री गोपाल भार्गव पर हमला करते हुए आलोक अग्रवाल ने लिखा, "शिवराज जी के कदमों पर उनके मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि गांवों में बिजली नहीं आई तो अफसरों को उल्टा लटका दूंगा। कोई विरोध नहीं उठा न किसी अफसर से, न किसी अफसरों की एसोसिएशन से।"
https://twitter.com/iAlokAgarwal/status/966863824308658181

इसके बाद हाल ही में शिवराज सिंह चौहान के थप्पड़ कांड को भी उन्होंने सोशल मीडिया पर तल्ख टिप्पणी के साथ उठाया। श्री अग्रवाल ने लिखा, "देखिये इस वीडियो को- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुलेआम एक सुरक्षा अधिकारी को थप्पड़ मारा। शिवराज जी को कुछ नहीं हुआ। आम आदमी पार्टी के विधायक सिर्फ कागजी शिकायत पर जेल भेज दिये जाते हैं।" इसी ट्वीट में उन्होंने शायराना अंदाज में लिखा, "हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम! वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती!!"
https://twitter.com/iAlokAgarwal/status/966730336615981061

कुल मिलाकर देखा जाए तो अब आम आदमी पार्टी मुख्य सचिव की शिकायत पर विधायकों की गिरफ्तारी पर हमलावर हो गई है। इस मामले में निजी बातचीत में आलोक अग्रवाल ने बताया कि, "मैं बहुत पहले से कहता रहा हूं कि इस देश में दो कानून चलते हैं। एक आम जनता और अन्य पार्टियों के नेताओं के लिए है, और दूसरा कानून जो लिखित नहीं है, वह भाजपा से जुड़े लोगों पर लागू होता है।" उन्होंने कहा कि "आईएएस अधिकारियों पर हमले के बड़े उदाहरण इस देश ने पहले भी देखे हैं, लेकिन बिना जांच के कार्रवाई की कोई घटना पहले सामने नहीं आई।"

गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों के साथ एक बैठक के बाद मुख्य सचिव ने आरोप लगाया था कि उनके साथ विधायकों ने बदसलूकी की। हालांकि बाद में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कहा कि मुख्य सचिव ने उन पर जातिवादी टिप्पणी की और विधायकों के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। इस मामले में आप के दो विधायकों को आनन-फानन में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि अदालत ने पुलिस कस्टडी की मांग ठुकराते हुए विधायकों को जमानत पर रिहा कर दिया है।
अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या होता है। लेकिन आम आदमी पार्टी के तेवर देखकर लग रहा है कि वह बचाव के बजाय आक्रामक अंदाज में भाजपा नेताओं की पिछले रिकॉर्ड को सामने लाने में जुट गई है।

सोशल मीडिया पर भी फैले पुराने मामले

दिल्ली में मुख्य सचिव और आप के विधायकों के बीच विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी आईएएस पर हमलों के पुराने मामले सामने आने लगे हैं। इनमें कहा जा रहा है कि तब एसोसिएशन क्यों सक्रिय नहीं हुई।
ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा, 2 महीने पहले भाजपा सांसद ने आईएएस को दी धमकी, कहा- जीना मुश्किल कर दूंगी, वीडियो न्यूज में भी आया कोई आईएएस नहीं बोला सांसद के खिलाफ। पर केजरीवाल के खिलाफ पूरा आईएएस एसोसिएशन वैसे साथ आ गया है जैसे डीएमए मैक्स हॉस्पिटल के लाइसेंस रद्द करने के विरोध में खड़ा हो गया था।
एक अन्य यूजर ने लिखा- मुझे याद है सीनियर आईएएस अधिकारी और उनकी बेटी की हरियाणा सरकार ने क्या गत की थी। आरोपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का बेटा था। आईएएस अधिकारी को प्रताडि़त करने के लिए उसका तबादला भी कर दिया। जो आईएएस असोसिएशन अपनी बेटियों के साथ खड़ी नहीं हुई उसे डूब मरना चाहिए।
एक फेसबुक कमेंट में लिखा गया- अशोक खेमका आईएएस अधिकारी का 51 बार तबादला किया गया। आईएएस असोसिएशन ईमानदारों के साथ क्यों नहीं खड़ी होती?
एक और फेसबुक पोस्ट में लिखा गया, अधिकारी बीके बंसल और पूरे परिवार ने आत्महत्या कर ली। खत में सीबीआई पर इल्जाम भी लगाए, आईएएस असोसिएशन को शर्म नहीं आई। आएगी भी नहीं, वरना 2जी और कोल स्कैम में धर लिए जाएंगे। 
वहीं मप्र के एक यूजर लिखा, एम्स का घोटाला खोलने वाले आईएएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के लिए कब हड़ताल करेगी हमारी आईएएस असोसिएशन। 

May 16, 2017

आईटी उद्योग : क्या वाकई है नौकरियों पर खतरा

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सचिन श्रीवास्तवआईटी सेक्टर को कभी जॉब के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता था और आईटी में जॉब करने वालों को इंडिया की बढ़ती पावर और चाहतों का पोस्टर बाय। पश्चिमी जगत के मुकाबले सस्ते में काम करने की क्षमता के दम पर मजबूत हुए आईटी आउसोर्सिंग सर्विसेज सेक्टर ने एजुकेटेड मिडल क्लास में उम्मीदों और तरक्की की नई चमक पैदा की थी। हालांकि उस इंडियन ड्रीम को झटका लग चुका है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है।
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खतरे का आकलन
एच-1बी वीजा पर ट्रंप प्रशासन की ओर से लगे प्रतिबंधों के कारण पहले से मुश्किल हालातों से जूझ रहा आईटी सेक्टर और भी खतरे में आ गया है। आईटी सेक्टर ऐसे दौर में है जब उसे खेल में बने रहने के लिए अपने दशकों पुराने बिजनस मॉडल को बदलना होगा। जिस तरह से मौके कम हो रहे हैं और मार्केट बदल रहा है, उसे देखते हुए 2020 तक एक तिहाई से ज्यादा सॉफ्टवेयर इंजिनियर्स अपनी नौकरी गंवा देंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि मार्केट की हालत ऐसी होगी कि निकाले गए इंजिनियर्स के लिए दूसरी नौकरी मिलना काफी मुश्किल होगा।
40 लाख लोग कार्यरत हैं आईटी इंडस्ट्री में
30 से 40 प्रतिशत जॉब्स पर खतरे की है आशंका
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नेसकॉम का इनकार
नेसकॉम ने ऐसे किसी खतरे से इनकार किया है। हालांकि यह माना है कि बाकी क्षेत्रों में नौकरियां कम होती हैं, तो इसका असर आईटी पर भी पड़ेगा, लेकिन खासतौर पर आईटी उद्योग पर नौकरियों का ऐसा कोई खतरा नहीं है।
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यह है वजहें
एच-1बी वीजा: अमेरिकी फर्मों को स्पेशलिटी सेगमेंट्स में अस्थायी तौर पर विदेशी कामगार हायर करने की इजाजत देने वाले एच-1बी वीजा पर प्रतिबंध लग चुका है।
पुराना बिजनेस मॉडल: भारतीय आईटी उद्योग का बिजनेस मॉडल करीब दो दशक पुराना है। इसमें लंबे समय से बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।
स्किल्स की कमी: भारत के सामने नौकरियों का संकंट है। हर साल 10 लाख इंजिनियर्स में से 90 प्रतिशत नौकरी देने लायक नहीं हैं।
सरकार का अधूरा वादा: मोदी सरकार ने चुनाव के दौरान हर साल 1 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। ऐसा नहीं है कि आर्थिक वृद्धि की दर कम है और नौकरियां नहीं निकल रही हैं। नई नौकरियां पैदा हो रही हैं लेकिन वह मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है।
अन्य क्षेत्रों का असर: आईटी से लेकर बैंकिंग तक और ऑटोमोबाइल से लेकर टेलिकॉम सेक्टर तक ऑटोमेशन ने जॉब मार्केट हिला दिया है। वल्र्ड बैंक के अनुसार इससे भारत में 69 प्रतिशत नौकरियों को खतरा है।
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बदलते हालात में कम जॉब
एक दशक पहले अपने पीक पर रहने के दौरान टेलिकॉम इंडस्ट्री में 40 लाख से ज्यादा वर्कर थे, लेकिन अब कंसॉलिडेशन (वोडाफोन-आइडिया और एयरसेल-आरकॉम) और टेक्नॉलजी के मामले में प्रगति ने हालात बदल दिए हैं। निकट भविष्य में इस इंडस्ट्री में 30-40त्न एंप्लॉयीज की जॉब जा सकती है। इसके अलावा स्ट्रेस्ड एसेट्स से दबे हुए बैंकिंग सेक्टर के कर्मचरियों पर डिजिटल टेक्नॉलजी की मार पड़ रही है। उदाहरण के लिए, एचडीएफसी बैंक के कर्मचारियों की संख्या 2016-17 की तीसरी तिमाही में 4500 कम हो गई, साथ ही बैंक नई हायरिंग में भी सुस्ती दिखा रहा है।
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अन्य सेक्टर्स में भी हालात खराब
दूसरे कर्मचारियों के बीच खराब हालात की जमीन लंबे समय से बन रही है। लोअर एंड पर ज्यादातर अकुशल और अशिक्षित मजदूर हैं। वहां संकट कहीं ज्यादा गहरा है। इंडिया में लेबर डेटा एक तो बहुत अंतराल पर आता है और उसमें पूरी तस्वीर भी नहीं दिखती।
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हर जगह मंदी
1.35 लाख नए रोजगार सृजित हुए 2015 में आईटी-बीपीओ, टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स और ऑटोमोबाइल्स जैसे आठ एक्सपोर्ट आधारित सेक्टरों में लेबर ब्यूरो सर्वे के मुताबिक।
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धीरे-धीरे खराब हुए हालात
2014 की एक क्रिसिल रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2011-12 और 2018-19 के दौरान कृषि क्षेत्र के अलावा महज 3.8 करोड़ नई नौकरियां पैदा होगी, जबकि 2004-05 से 2011-12 के बीच ऐसी 5.2 करोड़ नौकरियों के मौके बने थे।
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May 15, 2017

ऑनलाइन सर्च : यात्रा से पहले मुंबईकर करते हैं सबसे ज्यादा सर्च

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सचिन श्रीवास्तवहालिया सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक यात्रा पर जाने से पहले ऑनलाइन सर्च के मामले में मुंबई के लोग सबसे आगे हैं, जबकि 2.36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ राज्यों में गुजरात सबसे पीछे है।
स्रोत: एसोसिएशन ऑफ टूरिज्म ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन इंडिया और माईटूररिव्यू
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यात्रा सर्च में शीर्ष शहर
शहर हिस्सेदारी
मुंबई 11.6 प्रतिशत
बंगलूरु 10.38 प्रतिशत
हैदराबाद 9.98 प्रतिशत
चेन्नई 9.40 प्रतिशत
नई दिल्ली 5.79 प्रतिशत
लखनऊ 5.76 प्रतिशत
पुणे 5.64 प्रतिशत
कोच्चि 5.46 प्रतिशत
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राज्यों में यात्रा सर्च
महाराष्ट्र 19.48 प्रतिशत
कर्नाटक 12.38 प्रतिशत
तेलंगाना 10.98 प्रतिशत
दिल्ली 10.56 प्रतिशत
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75 प्रतिशत हनीमून ट्रिप की होती है ऑनलाइन बुकिंग
73 प्रतिशत ग्राहक ऑनलाइन बुकिंग इसलिए करते हैं कि इसमें सभी चीजों का ख्याल रखा जाता है
36 प्रतिशत लोग अपने दोस्तों की फोटो से प्रभावित होकर तय करते हैं घूमने की जगह
82 प्रतिशत लोग रिव्यू के आधार पर तय करते हैं होटल बुकिंग

भारत बना ब्रिटेन में तीसरा बड़ा निवेशक

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सचिन श्रीवास्तवब्रिटेन के विदेशी व्यापार विभाग (डीआईटी) के मुताबिक, अमरीका और फ्रांस के बाद भारत यहां तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है।
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ब्रिटेन में भारत
65 प्रतिशत ज्यादा निवेश किया भारत ने ब्रिटेन में इस साल, बीते साल के मुकाबले
1500 अरब रुपए से ज्यादा निवेश किया भारत ने ब्रिटेन में, बीते 15 साल में
140 प्रोजेक्ट में है भारतीय साझीदारी
9000 नई नौकरियां पैदा हुई भारतीय निवेश के कारण, एक साल में
1.10 लाख नौकरियां देती हैं भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में
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दुनिया में भारतीय निवेश
5 हजार अरब से ज्यादा का निवेश किया भारत ने बीते एक दशक में
21वें स्थान पर है भारत दुनिया में विदेशी निवेश के मामले में
50 गुना बढ़ोतरी हुई है 2000 के बाद विदेशी निवेश में

इस साल निवेश
17 बड़े निवेश किए निजी कंपनियों ने विदेशों में इस साल, आरबीआई के मुताबिक
10 बड़े निवेश भारत सरकार ने भी किए विदेशों में
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स्रोत: ब्रिटिश विदेश व्यापार विभाग, कोलंबिया सेंटर की एफडीआई रिपोर्ट और आरबीआई
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रफ्तार से मौत : आधे से ज्यादा सड़क हादसे होते हैं हाइवे पर

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सचिन श्रीवास्तवराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं न्यूरो विज्ञान संस्थान ने भारत में सड़क सुरक्षा के विश्लेषण पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक, देश के 52.4 प्रतिशत हादसे हाइवे पर होते हैं।
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पांच राज्यों में सबसे ज्यादा
46.8 प्रतिशत सड़क हादसे पांच दक्षिणी राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में होते हैं
80 प्रतिशत मामलों में मरने या घायल होने वाले पैदल चालक, दोपहिया चालक या साइकिल सवार होते हैं
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कई अध्ययनों का निष्कर्ष
20 प्रतिशत ज्यादा मौत होती हैं सड़क हादसों में सरकारी आंकड़ों के मुकाबले
50 प्रतिशत ज्यादा लोग होते हैं घायल सरकारी आंकड़ों के मुकाबले
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5 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में कम हादसे और मौत
22.1 प्रतिशत हादसे
11.3 प्रतिशत मौत
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हाइवे पर हादसे ज्यादा
52.4 प्रतिशत सड़क हादसे होते हैं हाइवे पर
63 प्रतिशत मौत होती हैं हाइवे पर
4.84 प्रतिशत है देश की कुल सड़क में हाइवे की हिस्सेदारी

ओबीओआर (ओबोर) परियोजना: भारत को घेरने का रास्ता तैयार कर रहा चीन

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सचिन श्रीवास्तव
2013 में
कजाकिस्तान में एक भाषण के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पहली बार सिल्क रोड के आर्थिक इस्तेमाल पर अपना नजरिया दुनिया के सामने रखा था। अब चार साल बाद एक बार फिर 14-15 मई को चीन इसका विस्तृत खाका दुनिया के सामने पेश कर रहा है। लेकिन इन चार सालों में कई चीजें बदली हैं। शुरुआत में यह विचार मध्य एशिया में परिवहन ढांचा विकसित करने के लिए पैसा उपलब्ध कराने के लिए था। अब इसमें वैश्विक राजनीति, सैन्य समझौते और एशिया राजनीति में प्रभुत्व की होड़ भी शामिल है।
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दुनिया का सबसे बड़ा निवेश 
03 महाद्वीपों एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सीधे तौर पर जोड़ेगा ओबोर प्रोजेक्ट
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दुनिया जुट रही चीन में
चीन के इस सम्मेलन में विभिन्न देशों और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। ब्रिटेन और जर्मनी के अलावा अमरीका का दल भी चीन में है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दो दिन पहले चीन पहुंच चुके थे। इटली के प्रधानमंत्री पाओलो जेंटिलोनी भी इसमें शिरकत कर रहे हैं। चीन से सैन्य मतभेद रखने वाले जापान और दक्षिणी कोरिया के प्रतिनिधि भी यहां हैं और दक्षिणी चीन सागर के मुद्दे पर चीन के खिलाफ खड़े वियतनाम और इंडोनेशिया भी ओबोर प्रोजेक्ट के हिस्सेदार हैं। भारत को छोड़कर सभी दक्षिण एशियाई देश भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं।

14-15 मई को शिखर सम्मेलन आयोजत हो रहा है चीन
29 देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे हैं बीजिंग
70 अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुख हैं शामिल
1200 से ज्यादा प्रतिनिधिमंडलों के समक्ष चीन पेश कर रहा अपनी योजना
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ओबोर का उद्देश्य
रेलवे, बंदरगाहों, हाइवे और पाइपलाइन के नेटवर्क के जरिये मध्य एशिया और यूरोप के व्यापार में नई जान डालना। साथ ही सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों को बेहतर बनाना।
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यह है योजना
65 देशों में नए सिल्क रूट से होगा बड़े पैमाने पर निवेश और विकास
4.4 अरब आबादी रहती है एशिया, अफ्रीका, यूरोप के इन देशों में
2.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी वैश्विक जीडीपी में इस रास्ते की
6 कॉरिडोर भी बनाने का प्लान है वन बेल्ट वन रूट (ओबोर) प्रोजेक्ट के तहत
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दो रास्ते
वन बेल्ट वन रोड (ओबोर) के दो रास्ते होंगे।
पहला रास्ता: जमीनी रास्ते से चीन को मध्य एशिया के जरिये यूरोप से जोड़ेगा। यह कभी सिल्क रोड कहा जाता था।
दूसरा रास्ता: समुद्री मार्ग से चीन को दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका होते हुए यूरोप से जोड़ेगा। इसे नया मैरिटाइम सिल्क रोड कहा जा रहा है।
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इतिहास दोहराने की तैयारी 
2000 साल से पहले चीन ने सिल्क रोड बनाया था। इसके तहत चीन को मध्य एशिया और अरब से जोडऩे वाले व्यापारिक रास्ते बनाए गए थे। उस वक्त चीन बड़ा सिल्क निर्यातक था।
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भारत की बेरुखी
चीन ने परियोजना के लिए भरोसे का माहौल पैदा नहीं किया। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर है भारत को आपत्ति। इसके अलावा ओबोर प्रोजेक्ट गिलगिट-बॉल्टिस्तान से होकर गुजरता है। इसलिए भारत, चीन के ओबोर फोरम से दूर है।
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दक्षिण एशिया की हामी
भारत को छोड़कर दक्षिण एशिया के सभी देश ओबोर प्रोजेक्ट पर सहमति जता चुके हैं। दो दिन पहले तक नेपाल, भारत के साथ था, लेकिन 12 मई को नेपाल ने भी इस प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस तरह अब भारत इसके विरोध में अकेला पड़ गया है।
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अमरीका और चीन आ रहे हैं करीब
चीन के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी अमरीका ने यूटर्न लेते हुए ओबोर में हिस्सा लेने पर सहमति जता दी है। इसे अमरीका-चीन के बीच राजनीतिक फैसला माना जा रहा है, लेकिन दोनों देशों की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ रही है। चीन ने '100 डे प्लान' समझौते के तहत अमरीकी बीफ खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं अमरीका अपने यहां चीनी बैंकों के विस्तार की अनुमति प्रदान करने पर राजी हो गया है।
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किसी को नहीं पता पूरी योजना
चीन का दावा है कि यह प्रोजेक्ट सभी देशों के लिए फायदे का सौदा है। हालांकि 6 आर्थिक गलियारे बनाने की योजना का अब तक कोई विश्वसीनय खाका उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि ओबोर सम्मेलन के बाद चीनी कंपनियों, सरकार और बाकी देशों के साथ समझौते पर इसका स्वरूप निर्भर करेगा।
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चीन का लाभ
- इस्पात और अन्य निर्माण सामग्री को मिलेगा नया बाजार
- ओवर प्रॉडक्शन की समस्या से मिल सकती है निजात
- ऊर्जा जरूरतों के लिए हो सकेगा इस रास्ते का इस्तेमाल
- एशिया में बड़ी ताकत बनने के लक्ष्य की बढ़ा सकेगा कदम
- अमरीकी सैन्य और आर्थिक प्रभुत्व होगा कम
- मध्य एशिया के विकास से उइगर मुस्लिमों के बीच चरमपंथ का जोखिम होगा कम
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अफ्रीका के लिए है घातक
- चीन इस योजना के जरिये अफ्रीका को अपना सामरिक गढ़ बनाना चाहेगा।
- कच्चे माल के बदले तैयार उत्पाद निर्यात करने की चीनी नीति से स्थानीय लोगों से छिन गए हैं रोजगार के अवसर
- विनिर्माण उद्योग खत्म होने के कगार पर है
- कर्ज में डूबे हैं ज्यादातर अफ्रीकी देश, इससे सामाजिक तनाव पैदा हो गया है
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भारत और अफ्रीकी देशों का बन सकता है गठजोड़
वन बेल्ट वन रोड के संभावित खतरे को भांपते हुए कुछ अफ्रीकी देश भारत के करीब आ रहे हैं। चीन के 14-15 मई को आयोजित ओबीओआर सम्मेलन में महज दो अफ्रीकी देश इथोपिया और केन्या शामिल हो रहे हैं। नाइजीरिया समेत घाना और अंगोला आदि कई अफ्रीकी देशों ने चीन का विरोध किया है।
2014 में दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा ने चीन के साथ असंतुलित व्यापार को लेकर चेतावनी दी थी
2015 में खराब बर्ताव की शिकायत के बाद जांबिया ने एक चीनी कॉपर माइन अपने कब्जे में ले ली थी। 

May 14, 2017

आधा घंटा ज्यादा एप इस्तेमाल करने लगे हैं भारतीय

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सचिन श्रीवास्तवडाटा एनालिस्ट कंपनी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों ने 2017 के पहले तीन महीने में प्रतिदिन 2.5 घंटे एप का इस्तेमाल किया। 2016 में यह हर यूजर हर रोज 2 घंटे एप का इस्तेमाल करता था।
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विकसित देशों से आगे
1.5 से 2 घंटे इस्तेमाल करते हैं एप प्रतिदिन अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के यूजर
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1 लाख करोड़ घंटे ज्यादा इस्तेमाल किया एप का दुनिया के सभी यूजर्स ने कुल मिलाकर, 2016 के मुकाबले
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09 एप इस्तेमाल करता है प्रतिदिन औसतन वैश्विक यूजर
10 एप प्रतिदिन इस्तेमाल के साथ ब्राजील, चीन और भारतीय यूजर्स आगे
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80 के करीब एप इंस्टॉल किए औसत भारतीय स्मार्टफोन यूजर ने साल के पहले तीन महीनों में
40 से ज्यादा एप का इस्तेमाल करता है औसत भारतीय यूजर हर महीने
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स्रोत: एप एनी की रिपोर्ट 
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35 प्रतिशत कामकाजी मांएं एक ही बच्चे से हैं खुश

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सचिन श्रीवास्तवशुक्रवार को सामने आए एक सर्वे के मुताबिक, एक तिहाई कामकाजी मांएं एक ही बच्चे को बेहतर परवरिश देना चाहती हैं, वे दूसरा बच्चा नहीं चाहतीं।
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एसौचैम के सामाजिक विकास विभाग का सर्वे
1500 कामकाजी मांओं से की गई बातचीत
10 शहरों (अहमदाबाद, बंगलूरु, चैन्नई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई) में किया गया अध्ययन
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कॅरियर पर भी खतरा
500 से ज्यादा मांओं ने हिचक के साथ कहा कि एक और मातृत्व अवकाश से प्रमोशन पर पड़ सकता है नकारात्मक असर
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वजहें
- दो बच्चों की परवरिश में लगता है ज्यादा वक्त
- कामकाजी होने के कारण वक्त की कमी
- परवरिश का बढ़ जाता है खर्च
- दो बच्चों में बंट जाता है प्यार
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65 प्रतिशत मांओं ने कहा चाहती हैं दूसरा बच्चा
क्योंकि
वे चाहती हैं कि उनके बच्चे अकेले न रहें और चीजों को बांटने और साझा करने की खुशी महसूस कर सकें

May 13, 2017

शोध और अध्ययन : केमिस्ट्री रिसर्च में चीन से पिछड़ रहे हम

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सचिन श्रीवास्तवशोध बताते हैं कि कैमिस्ट्री रिसर्च के क्षेत्र में चीन लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
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1 प्रतिशत शीर्ष जर्नल में
38 प्रतिशत रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हैं चीन के 2014 के बाद
8.9 प्रतिशत लेख ही छपे भारतीय लेखकों के
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दो उदाहरण
अमरीकन कैमिकल सोसाइटी
144 पेपर्स प्रकाशित हुए भारतीय कैमिस्ट के 2011 से 2015 के दौरान
1857 रिसर्च पेपर चीन के कैमिस्ट के प्रकाशित हुए इस दौरान
कैमिकल कम्यूनिकेशन
794 पेपर्स प्रकाशित हुए 2011 से 2015 के दौरान भारतीयों के
6084 पेपर्स चीनी कैमिस्टों के आए इस दौरान
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1991 से 2015 के बीच विभिन्न कैमिस्ट्री रिसर्च प्रकाशनों का किया गया अध्ययन
25 शीर्ष कैमिस्ट्री जर्नल का किया गया विस्तृत अध्ययन
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स्रोत: नेचरइंडेक्स, साइमागो, वेब ऑफ साइंस
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उदारीकरण का असर : दलित, आदिवासी और मुसलमान सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच से बाहर

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सचिन श्रीवास्तवसेंटर ऑफ इक्विटी स्टडीज (सीईएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में दलित, आदिवासी और मुसलमानों के साथ दिव्यांग सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच से लगातार बाहर हैं।
स्रोत: इंडियन एक्सक्लूजन रिपोर्ट 2016
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04 सार्वजनिक सेवाओं का अध्ययन
रिपोर्ट में चार सार्वजनिक सेवाओं वृद्धावस्था पेंशन, डिजिटल तकनीक तक पहुंच, खेती योग्य जमीन और न्याय को किया गया है शामिल।
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अपनी जमीन नहीं 
57.3 प्रतिशत दलितों के पास नहीं है अपनी जमीन
52.6 प्रतिशत मुसलमान भी जमीन के मालिक नहीं
40.5 प्रतिशत हिंदू परिवारों के पास नहीं है अपनी जमीन
40 फीसदी आदिवासियों को विस्थापित होना पड़ा है विकास संबंधी परियोजनाओं की वजह से
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महिलाएं जमीन से बेदखल
जिन परिवारों के पास जमीन नहीं है, उनमें ऐसे परिवारों की संख्या ज्यादा है, जिनकी प्रमुख महिलाएं हैं।
56.8 प्रतिशत परिवारों के पास जमीन नहीं है, जिनकी मुखिया महिला है
39.5 प्रतिशत है पुरुष मुखिया वाले ऐसे परिवारों की संख्या
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विकास से दूर गरीब 
1990 के बाद तीन गुना तेज हो गई है विकास दर
0.65 प्रतिशत की दर से ही कम हुई गरीबी उदारीकरण के बाद
0.94 प्रतिशत की दर से कम हुई 1981 से 1990 के बीच गरीबी

सरकारी रिपोर्ट : लक्ष्य से भटकी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

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सचिन श्रीवास्तव
एक सरकारी समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना अपने शुरुआती दौर में मुख्य उद्देश्य को पाने में असफल रही है। योजना का मूल उद्देश्य बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराना था, लेकिन अब तक यह युवाओं को प्रशिक्षण केंद्रों से जोडऩे का जरिया ही साबित हुई है। शिक्षा एवं प्रशिक्षण के पूर्व महानिदेशक शारदा प्रसाद की अध्यक्षता वाली सरकारी समिति ने इस योजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

18 लाख युवाओं को प्रशिक्षण
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत अब तक देश भर में 18 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इसके लिए 1500 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। लेकिन योजना के मूल उद्देश्य यानी रोजगार सृजन में कोई इजाफा नहीं हुआ है।

निजी संस्थानों की जेब भरने का जरिया
प्रसाद पैनल की रिपोर्ट और उद्योग जगत के अधिकारियों के मुताबिक, यह योजना पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की मुफ्त व्यावसायिक प्रशिक्षण संबंधी पहलों के रास्ते पर चली और निजी व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों की जेब भरने का जरिया बन गई।

एनएसडीसी और एसएससी की भूमिका
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को लागू करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) की है। रिपोर्ट के मुताबिक, एसएसी का पूरा ध्यान योजना के क्रियान्वयन पर रहा, लेकिन यह ध्यान नहीं रखा गया कि यह प्रशिक्षण उद्योगों की जरूरत और वैश्विक मानकों के अनुरूप है या नहीं।

दो साल पहले शुरुआत
2015 में 15 जुलाई को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री ने लॉन्च किया था स्किल इंडिया कैंपेन
20 लाख से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण देने का था लक्ष्य पहले साल में
13 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया था इससे पहले साल 2014-15 में एनएसीडीसी ने

यूपीए से बड़ा लक्ष्य
15 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा था यूपीए सरकार ने 2022 तक
40 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया 2022 तक
1500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया पीएमकेवाई योजना के पहले चरण में

बड़े लक्ष्य बने मुसीबत
प्रसाद समिति के मुताबिक, पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार के बड़े लक्ष्य योजना के लिए बड़ी मुसीबत साबित हुए हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित करने की होड़ में बाजार की मांग का ध्यान नहीं रखा गया और न ही उच्च स्तरी शिक्षा दी गई। नतीजतन योजना प्रशिक्षण देने का जरिया बनकर रह गई और कुशल बेरोजगारी में भी बढ़ोतरी होने लगी।

योजना के तहत खराब प्लेसमेंट
प्रसाद समिति के मुताबिक रोजगार देने के मामले में मोदी सरकार की योजना पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की 2013 की स्टेंडर्ड ट्रेनिंग असैसमेंट एंड रिवार्ड (स्टार) योजना जैसी ही साबित हुई है।

पीएमकेवाई योजना

18.03 लाख लोगों को दिया गया 2015-16 में प्रशिक्षण
12.4 प्रतिशत प्रशिक्षित बेरोजगारों को ही मिल सका रोजगार
खर्च: 1500 करोड़ रुपए

स्टार योजना
14.15 लाख लोगों को दिया गया 2014-15 में प्रशिक्षण
8.5 प्रतिशत लोगों को मिला रोजगार
खर्च: 1000 करोड़ रुपए

फायदा
2500 करोड़ रुपए का फायदा हुआ निजी प्रशिक्षण संस्थानों को दोनों योजनाओं के तहत

प्रशिक्षण कोर्स बेहद छोटे
एसएससी ने कौशल विकास योजना के तहत जिन प्रशिक्षण संस्थानों को चिन्हित किया, उनके कोर्स भी मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। यह बेहद छोटे हैं।
100 से 300 घंटों के हैं ज्यादा प्रशिक्षण कौशल कोर्स
3 महीने का प्रशिक्षण देते हैं औसतन विभिन्न संस्थान

65 साल पहले हुई थी राज्य सभा की पहली बैठक

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सचिन श्रीवास्तव
भारतीय लोकतंत्र के ऊपरी प्रतिनिधि सभा राज्यसभा के सदस्यों की संख्या 250 तक हो सकती है। फिलहाल इसके 245 सदस्य हैं। 

3 अप्रैल 1952 को हुआ था राज्यसभा का पहली बार गठन 13 मई 1952 को हुई थी राज्यसभा की पहली बैठक
12 सदस्यों को राष्ट्रपति करते हैं नामांकित राज्यसभा के लिए

नामकरण

23 अगस्त, 1954 को राज्य सभा के सभापति ने घोषणा की कि काउंसिल ऑफ स्टेट्स को अब हिन्दी में 'राज्य सभा' कहा जाएगा।

स्थायी सदन 
राज्यसभा को भंग नहीं किया जा सकता है। इसके एक तिहाई सदस्य हर दो साल बाद सेवानिवृत हो जाते हैं।

लोकसभा से भिन्न
6 साल के लिए चुने जाते हैं सदस्य, लोकसभा में पांच साल का कार्यकाल
30 साल है सदस्यों की न्यूनतम निर्धारित आयु। लोकसभा के लिए 25 वर्ष।

6 माह का अधिकतम अंतराल होना चाहिए राज्यसभा की दो बैठकों के बीच
05 केंद्र शासित प्रदेशों अंडमान-निकोबार, चंडीगढ, दादरा-नगर हवेली, लक्षद्वीप और दमन-दीव का नहीं है राज्यसभा में प्रतिनिधित्व
04 राज्यसभा सदस्य इंदिरा गांधी, एचडी देवगोड़ा, इंद्र कुमार गुजराल और डा. मनमोहन सिंह बने प्रधानमंत्री

पहले सभापति 
डॉ एस. राधाकृष्णन थे राज्यसभा के पहले सभापति। वे अकेले ऐसे सभापति हुए जो दो पूर्ण कार्यकाल (13 मई 1952 से 12 मई 1962) तक पद पर रहे।

April 29, 2017

पर्यटन का मौसम : 50 प्रतिशत कम हो सकता है सैर का खर्च

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सचिन श्रीवास्तव
गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है और इसी के साथ सैर का सिलसिला भी जोर पकडऩे लगा है। बीते एक दशक में पर्यटन उद्योग तेजी से बदला है और भारतीय पर्यटकों का इस साल का विदेशी खर्च तो चौंकाने वाला है। व्यक्तिगत विदेशी खर्च के मामले में भी यात्रा खर्च अब बढ़ गया है। एक वक्त में भारतीय विदेशों में रहने वाले अपने करीबियों और पढ़ाई पर सबसे ज्यादा खर्च करते थे, लेकिन अब व्यक्तिगत यात्राओं यानी सैर पर ज्यादा खर्च हो रहा है। ऐसे में जानते हैं मौजूदा खर्च के हालात और इसे कम करने के कुछ दिलचस्प, नए और अनूठे तरीकों के बारे में।

विदेश यात्रा पर सबसे ज्यादा व्यक्तिगत खर्च

इस साल भारतीयों ने व्यक्तिगत विदेश यात्रा पर सबसे ज्यादा खर्च किया है। इससे पहले तक विदेशों में रह रहे अपने करीबी परिजनों की देखभाल और पढ़ाई पर सबसे ज्यादा खर्च होता था। इस बदलाव की एक बड़ी वजह रिजर्व बैंक की रेमिटेंस

April 28, 2017

कम होती लागत : बुनियादी सेवाएं हो रही हैं सस्ती

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सचिन श्रीवास्तव
दुनिया भर में आज इस बात पर चिंता जाहिर की जा रही है कि ऑर्टिफिशियल इंटेलीजैंस और रोबोटिक तकनीक कैसे हमारी नौकरियां छीन रहे हैं, हमारी आय के स्रोत खत्म कर रहे हैं, आमदानी के स्रोत कम कर रहे हैं और साथ-साथ पारंपरिक अर्थव्यवस्था को खत्म कर दे रहे हैं। इसके असर को फौरी तौर कम करने के लिए भारत समेत कनाडा और फिनलैंड जैसे देश सार्वभौमिक न्यूनतम आय यानी यूनिवर्सल बेसिक इनकम के विचार पर आगे बढ़ रहे हैं। इसमें हर नागरिक को बिना शर्त एक तय राशि देने के विकल्प पर बात की जा रही है। लेकिन इस आपधापी के बीच एक बात पर लोगों की नजर नहीं जा रही है, और वह है जीवनयापन की लागत में कमी। जी हां, यह सच है कि हमारा जीवन यापन सस्ता होता जा रहा है। तकनीक और विकास ने आवास, यातायात, खाना, स्वास्थ्य, मनोरंजन, कपड़े, शिक्षा जैसी बुनियादों जरूरत की लागत में कमी ला दी है। आप माने या न मानें लेकिन यह सच है।

मौजूदा दौर में कैसे खर्च करते हैं हम पैसा

दुनिया भर में इंसान का पैसा खर्च करने का तरीका तकरीबन एक जैसा है। बुनियादी जरूरतों और सेवाओं पर खर्च की यह एकरूपता दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इतनी समान है कि विकासशील

April 27, 2017

फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव : दक्षिण पंथी ली पेन और युवा मैक्रोन में सीधी टक्कर

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सचिन श्रीवास्तव
इस वक्त यूरोप समेत पूरी दुनिया की नजरें 7 मई को होने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव पर लगी हैं।  इस चुनाव का असर आने वाले कई दशकों तक दिखाई देगा यह तय है। फ्रांस के पांचवें गणराज्य में यह पहला मौका है, जब किसी राष्ट्रपति ने अगला चुनाव लडऩे से मना कर दिया था। फ्रास्वां ओलांद की अनिच्छा के बाद 11 उम्मीदवार पहले चरण में राष्ट्रपति भवन एलसी पैलेस जाने की दौड़ में शामिल थे। पहले चरण में किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत वोट नहीं मिले हैं, इसलिए फैसला 7 मई को दूसरे चरण की वोटिंग से होगा। जिसमें घोर दक्षिणपंथी नेता मरीन ली पेन और एमैनुअल मैक्रोन में सीधी टक्कर है। दशकों बाद ऐसे हालात बने है कि स्थिति स्पष्ट नजर नहीं आ रही है। इस बार के नतीजों को यूरोपीय संघ के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोच का फासला
फ्रांस के राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल मरीन ली पेन और एमैनुएल मैक्रोन के बीच बहुत समानताएं हैं, तो सोच का फासला भी है। ली पेन अपने देश की सीमाओं को सुरक्षित करने और व्यापार को संरक्षण की नीति की पैरोकार हैं। वहीं मैक्रोन ग्लोबलाइजेशन के पक्षधर हैं और यूरोपीय यूनियन के साथ रहना चाहते हैं। विभिन्न मुद्दों पर दोनों प्रत्याशियों का