December 4, 2007

2007 की सबसे अच्छी पोस्ट मोहल्ले की बेटी के नाम

ज्यादा दिन नहीं बीते जब दिलीप मंडल ने शर्त लगाई थी कि मध्यावधि चुनाव होंगे. मैं भी शर्त लगाता हूं कि यह जो पोस्ट आप पढ रहे हैं यह इस साल की हिंदी ब्लागिंग की सबसे बेहतर यानी सर्वश्रेष्ठ पोस्ट है. अगर कोई और दावेदार है तो वो अपनी पोस्ट डाले. बाकी पाठक बंधु फैसला कर देंगे. तो लीजिए सारे काम छोडिए और खो जाइये सपनों के इस रंग में. इस पोस्ट का ख्याल मेरी दोस्त और कानखींचू भाभी मुक्ता से मिला, जो ३० नवंबर को मां बनी है. आपको नहीं लगता मोहल्ले की बेटी का जीवन कुछ ऐसा ही होगा












































6 comments:

दिलीप मंडल said...

सचिन भाई, अपना वोट आपकी इस पोस्ट को देता हूं। और मध्यावधि की शर्त फिलहाल वापस लेता हूं। जब शर्त लगाई थी तब राजनीतिक आकलन में नंदीग्राम नहीं था। शर्त कड़क चाय की थी। तो जिन्होंने भी लगाई, सबकों निमंत्रण। समय आप बता दें। स्थान दिल्ली रखने की थोड़े समय के लिए मजबूरी है।

सचिन लुधियानवी said...

कोई गल नहीं जी. चाय आपकी रहेगी. जगह मोहल्ले में कहीं भी रख लें. इस दौरान रवीश भाई की बतकही हो तो चाय में शक्कर की जरूरत ही नहीं रहेगी, जो कि आपकी चिंताओं में शामिल होती है

रंजू said...

sundar tasveeren hain ...

PD said...

अजी हम तो आपके ही पक्ष में वोट देंगे.. इससे अच्छी पोस्ट हो ही नहीं सकती है.. अब भाई भतीजावाद के जमाने में भैया, भाभी और भतीजी के खिलाफ मैं कैसे हो जाऊं.. :D
और अगर सिद्धांतवादी रवैया भी अपनाऊं तो भी बेटी के खिलाफ तो जाया ही नहीं जा सकता है..
:)

anitakumar said...

हम पी डी जी से सहमत हैं

avinash said...

लेकिन यार एक करेक्‍शन है। नवंबर में 31 दिन नहीं होते, तीस ही होते हैं।