March 29, 2017

मध्य वर्ग के लिए किफायती न्याय की शीर्ष पहल

सचिन श्रीवास्तव
भारतीय न्याय व्यवस्था में गरीब व्यक्ति की राह बेहद मुश्किलों भरी है। इस समस्या के निदान की पहल करते हुए शीर्ष अदालत ने न्याय हासिल करने की प्रक्रिया को किफायती बनाने के लिए बड़ी पहल की है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य वर्ग को कानूनी सहायता देने के लिए 'मिडल इनकम गु्रप लीगल एड सोसाइटी' नाम की कए योजना शुरू की है। इस समूह के माध्यम से आम भारतीय बेहद कम दरों पर वकील की सेवा ले सकते हैं।


60 हजार
रुपये मासिक या सालाना 7.5 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों को सस्ती दर पर कानूनी सहायता की योजना

सही सलाह और न्यूनतम शुल्क की कोशिश
दिक्कत यह है कि आम भारतीय को यह भी पता नहीं होता है कि वह अपने मामले को अदालत की चौखट तक लेकर कैसे जाए। विशेषज्ञ बताते हैं कि
ज्यादात लोग नहीं जानते कि मुकदमा लडऩे के लिए वे किस तरह अदालत तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के साथ मिडल इनकम गु्रप लीगल एड सोसाइटी यह सुनिश्चित करेगी कि लोगों को न्यूनतम शुल्क पर सही सलाह मिल सके।

सख्त नियम की दरकार
इस पहल के बारे में कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों को अधिक सख्त बनाया जाना चाहिए। जैसे शीर्ष अदालत की घोषणा में कहा भी गया है कि यदि वकील लापरवाह पाया जाता है तो उसे फीस लौटानी होगी। अब तक ऐसा नहीं होता था। वकील फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बावजूद किसी तरह के नियमों से नहीं बंधे हुए थे। एक ही मामले के लिए वकीलों की फीस भी अलग-अलग है।

हर काम की दर हुई है तय
अब तक विभिन्न कानूनी कामों के लिए कोई तयशुदा मानक फीस नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट की सोसाइटी ने शुल्क को किफायती बनाते हुए मानक दरें तय की हैं। जैसे विशेष अनुमति याचिका, अपील या जमानत के लिए मसौदे और फाइल के लिए महज 10 हजार रुपये फीस ली सकती है। आमतौर पर ऐसी याचिकाओं की फीस 50 हजार से 1 लाख रुपये तक होती है। ज्यादा चर्चित वकील होने पर यह रकम और ज्यादा हो सकती है।

ऐसे तय होती है न्याय की शुल्क
हमारी न्याय व्यवस्था में वकीलों की दो श्रेणियां हैं- वरिष्ठï वकील और अन्य। आम तौर पर माना जाता है कि वरिष्ठ वकील होने पर मामले की सुनवाई जल्दी होती है। लेकिन बड़ी कानूनी फर्म और वरिष्ठ वकीलों की फीस ज्यादातर मामलों में काफी ज्यादा होती है। सुप्रीम कोर्ट की कानूनी मदद योजना में वरिष्ठï वकीलों की फीस को भी सीमित किया गया है। अधिसूचना में स्टेनो, फोटोकॉपी और प्रिंट आउट और वकीलों के लिए भी शुल्क निर्धारित है।

कैसे काम करेगी सोसाइटी
- सोसाइटी की सेवा हासिल करने के लिए संबंधित व्यक्ति आवेदन देगा।
- सोसाइटी का सचिव संबद्घ दस्तावेज एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड यानी उपलब्ध वकील को भेजेगा।
- आवेदक वकील का चयन कर सकता है और तीन नाम तक दे सकता है।
- एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड दस्तावेजों पर विचार करेगा और देखेगा कि क्या मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने योग्य है या नहीं।
- वकील के संतुष्ट होने के बाद सोसाइटी आपको कानूनी मदद मुहैया कराएगी।


सोसाइटी की तय फीस


याचिकाकर्ता के लिए
10 हजार रुपए विशेष अनुमति याचिका, अपील और जमानत के लिए
5 हजार रुपए हस्तांतरण याचिका, हलफनामा, नोटिस आदि के मामले में
03 हजार प्रतिदिन की फीस वकील की होगी सुनवाई के लिए। कई सुनवाई की स्थिति में अधिकतम 9 हजार रुपए।

प्रतिवादी के लिए
05 हजार रुपए जवाबी हलफनामा, आपत्ति, स्टे के लिए आवेदन जैसे मामलों में
03 हजार रुपए वकील की फीस प्रति सुनवाई। अधिकतम 9 हजार

वरिष्ठ वकील की सेवाएं

02 हजार रुपए विशेष अनुमति याचिका का समझौता, अपील या हस्तांतरण याचिका के मामले में
05 हजार रुपए शुरुआती सुनवाई के दौरान या नोटिस के मामले में प्रति दिन। अधिकतम 10 हजार तक।
7 हजार रुपए अंतिम सुनवाई के वक्त। अधिकतम 14 हजार रुपए।

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