August 6, 2010

खिलाडिय़ों की दुनिया में अंधविश्वासी कम नहीं

अंधविश्वास : कुछ फुटकर नोट्स और टॉप के अंधविश्वासियों पर एक नजर: भाग दो
अंधविश्वास का शिक्षा से कोई संबंध नहीं है। चूंकि यह विश्वास और डर का मसला है, इसलिए शिक्षा से अंधविश्वास पर कोई खास फर्क नहीं पढ़ता। हां शिक्षित वर्ग अगर अंधविश्वास में धंसता है, तो उसे बाहर खींचना जरूर एक ज्यादा मुश्किल काम है। क्रिकेट के मशहूर खिलाडिय़ों में अंधविश्वास के किस्से तो आम हैं, जैसे भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर उल्टा पैड पहले पहनते हैं। स्टीव वॉ अपनी जेब में हमेशा लाल रूमाल रखते थे। लेकिन फुटबॉल की दुनिया के सितारे भी कतई पीछे नहीं हैं।
फीफा विश्व कप में आठ सटीक भविष्यवाणियां करके दुनिया भर में मशहूर हुए ऑक्टोपस पॉल के अंदर की दैवीय शक्ति के बारे में कह पाना हालांकि मुश्किल है, लेकिन फुटबॉल के खेल में अंधविश्वासों की कोई कमी नहीं रही है।
  • इंग्लैंड के पूर्व महान स्ट्राइकर गैरी लिनेकर इतने अंधविश्वासी थे कि मैच से पहले अभ्यास में कभी भी गोल के लिए शॉट नहीं लगाते थे, क्योंकि उन्हें डर था कि वे मुकाबले से पहले ही अपने सारे अच्छे शॉट खराब कर देंगे।
  • इसी देश के महान खिलाड़ी बॉबी मूर सभी खिलाडिय़ों के शॉट्र्स पहनने के बाद आखिर में शॉट्र्स पहनते थे।
  • क्लब चेल्सी के सेंटर बैक और इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जॉन टेरी टूर्नामेंट के दौरान टीम बस में एक ही सीट पर बैठते हैं, ट्रेनिंग के लिए मैदान पर जाते हुए अपनी कार में एक ही सीडी सुनते हैं और कार की पार्किंग के लिए एक ही स्थान चुनते हैं। इसके अलावा वे 10 साल से एक ही 'शिन पैड' (पिंडली के लिए इस्तेमाल होने वाले पैड) का इस्तेमाल कर रहे थे, जो चैम्पियंस लीग के दौरान चोरी हो गए। अब वे चेल्सी के साथी फ्रैंक लैंपार्ड द्वारा इस्तेमाल किए गए 'शिन पैड' पहनते हैं।
  • उनके साथी खिलाड़ी को विश्वास है कि बाल कटवाने से चोट लगने की आशंका खत्म हो जाती है। कई खिलाडिय़ों के लिए उनकी टीशर्ट पर पड़े नम्बर खासे मायने रखते हैं।
  • माना जाता है कि ब्राजील और अर्जेंटीना की टीम की 10 नंबर की टीशर्ट उसे पहनने वाले में महामानव सी शक्ति भर देती है। ब्राजील में पेले के बाद जिको और काका ने 10 नम्बर टीशर्ट के रहस्य को अबूझ बनाया।
  • आमतौर पर दुर्भाग्यपूर्ण समझी जाने वाली संख्या 13 फुटबॉल के खेल में अनलकी नहीं है। इस नम्बर की टीशर्ट पहन रहे ब्राजील के डेनी एल्विस, अर्जेंटीना के वाल्टर सैमुअल, जर्मनी के थॉमस म्युलर, इटली के साल्वातोर बोशेती और इंग्लैंड के स्टीफन वारनॉक से बहुत उम्मीदें बावस्ता हैं।
  • एशियाई टीमें चार नम्बर को टालना पसंद करती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह संख्या बदकिस्मती लेकर आती है। हालांकि एशियाई अंधविश्वासियों की नजर में 13 नम्बर बुरा नहीं है।
  • आयरलैंड के अंतरराष्ट्रीय गोलकीपर शाये गिवन जब भी मैदान पर जाते थे तो वे 'पवित्र जल' को एक छोटी शीशी में भरकर गोलपोस्ट के पीछे रख देते थे।
  • वहीं आयरलैंड के ही गोलकीपर अपनी जन्मस्थली 'काउंटी डोनेगल' की मिट्टी का टुकड़ा अपने दस्ताने के बैग में रखते थे।
  • अर्जेंटीना ने 1986 विश्व कप जीता था, जिसमें डिएगो मेराडोना ने अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन उस समय उनके कोच कालरेस बिलाडरे ने अपने सभी खिलाडिय़ों पर चिकन खाने पर प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि वे मानते थे यह टीम के लिए दुर्भाग्य लाएगा और वे प्रत्येक मैच में 'वर्जिन मैरी' की मूर्ति ले जाते थे।
  • मैक्सिको में इसी विश्व कप के दौरान ग्रुप चरण में टीम की बस खराब हो गई, जिससे उन्हें टैक्सी लेनी पड़ी जिसके बाद टीम ने जीत दर्ज की। इसके बाद बिलाडरे बचे हुए सभी मैचों में खिलाडिय़ों को टैक्सी से ले गए।
  • दुनिया के सबसे महंगे फुटबॉलर रोनाल्डो हर मैच से पहले थोड़े बाल कटवाते हैं ताकि उनके गोल करने का सिलसिला बना रहे।
  • अर्जेंटीना के पूर्व अंतराष्ट्रीय गोलकीपर सर्गियो गोयकोचिवा का अंधविश्वास काफी अजीबोगरीब है क्योंकि वे मानते थे कि अगर उनकी टीम पेनल्टी शूटआउट में जाती है तो वे पिच पर 'टॉयलेट' करेंगे तो टीम इसमें जीत दर्ज करेगी।
  • आयरलैंड के मौजूदा कोच गियोवानी ट्रैपोटोनी भी 'पवित्र जल' पर बहुत विश्वास रखते हैं। उनकी बहन एक 'नन' हैं और उनके द्वारा दिए गए पवित्र जल को वे पिच पर छिड़कते हैं।
  • फ्रांस के पूर्व अंतरराष्ट्रीय डिफेंडर और राष्ट्रीय टीम के मैनेजर लॉरेंट ब्लैंक 1998 विश्व कप के प्रत्येक मैच से पहले गोलकीपर फाबियेन बाथ्रेज के सिर को चूमते थे क्योंकि उन्हें विश्वास था कि इससे उन्हें हर मैच में जीत मिलती है। दिलचस्प बात यह है कि टीम ने इस साल विश्व कप खिताब अपने नाम किया था।
  • इस विश्व कप में फ्रांस के कोच रेमंड डोमेनेक टीम चुनने से पहले और लाइन अप से पहले अपने खिलाडिय़ों की 'कुंडली' देखते थे।
  • लीड्स यूनाईटेड के पूर्व मैनेजर डॉन रेवी 10 साल से ज्यादा समय ये मैच के दौरान गहरे नीले रंग का 'लकी' सूट पहनते हैं और वह टीम के डगआउट में जाने के लिए भी एक ही रास्ता अख्तियार करते हैं। साथ ही उन्हें लगता है कि पक्षी उनके और टीम के लिए दुर्भाग्यशाली हैं।
  • पीसा के पूर्व अध्यक्ष और इटली के रोमियो एनकोनेटानी अपनी टीम के प्रत्येक मैच से पहले पिच पर नमक डालते थे। दिलचस्प बात यह है कि जितना अहम मैच होता था वह उतना ही ज्यादा नमक पिच पर छिड़कते थे। एक बार तो उन्होंने स्थानीय प्रतिद्वंद्वी टीम सेसेना के खिलाफ 26 किलो नमक डाला था।
  • रोजारियो सेंट्रल के पूर्व मैनेजर रेनाल्डो मलरे मानते हैं कि फूल दुर्भाग्य लाते हैं, जिसके कारण विपक्षी टीम के प्रशंसक डगआउट में उनकी सीट की तरफ फूल फेंका करते थे।
  • स्पेन के पूर्व कोच लुईस अरागोनेस पीले रंग को बहुत बुरा मानते थे। स्पेन के पूर्व कप्तान रॉल ने एक बार ट्रेनिंग सत्र में पीली जर्सी पहन ली तो उन्होंने इसे बदलवाकर ही छोड़ा।
फुटबॉल के अलावा अन्य खेलों में अंधविश्वासी व सनकियों की कमी नहीं है।
  • विश्व के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी स्पेन के नडाल मैच के दौरान हर गेम के बाद कुर्सी पर बैठते समय अपनी पानी की बोतल को उठाने के बाद जब वापस रखते हैं तो वह उस बोतल को ठीक उसी तरह रखते हैं जैसे बोतल उठाए जाने से पहले अपनी जगह पर रखी होती थी।
  • विश्व की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी अमेरिका की सेरेना पूरी स्पर्धा के दौरान एक ही जोड़ी जुराब पहनना पसंद करती हैं और वह अपने जूतों के फीते हर मैच में एक ही अंदाज से बांधती हैं।
  • इंग्लैंड के स्टार फुटबॉलर डेविड बेकहम को यदि शीतल पेय के तीन केन दिए जाएं तो वह सम संख्या पाने के लिए एक केन को फेंक देते हैं।
  • अमेरिका के शीर्ष टेनिस खिलाड़ी एंडी रॉडिक यदि मैच के दौरान अच्छा खेल रहे हों तो वह अपनी शर्ट नहीं बदलते।
  • अमेरिका के महान बास्केटबॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन अपनी बुल्स यूनिफार्म के नीचे अपनी भाग्यशाली नीले रंग की उत्तरी कैरोलीना वाली शॉर्ट्स पहना करते थे।
  • टाइगर वुड्स के बिना बात अधूरी है। वुड्स किसी भी प्रतियोगिता के आखिरी रविवार को, जो अक्सर प्रतियोगिता का आखिरी और महत्वपूर्ण दिन भी होता है, लाल रंग की टी-शर्ट पहनते हैं।
अब बात करते हैं क्रिकेटरों के अंधविश्वास की
  • भारत के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सेहवाग भी कई मायनों में घोर अंधविश्वासी हैं। सचिन जब इस साल ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय इतिहास का पहला दोहरा शतक बनाने की तरफ अग्रसर थे तो अनुभवी बल्लेबाज के 190 के स्कोर तक पहुंचने तक वीरू ने एक बार भी ताली नहीं बजाई थी। सचिन के 200 रन पूरे करने के बाद वीरू ने कहा था, मैं अंधविश्वास को मानता हूं। मैं शॉट पर तालियां नहीं बजाता क्योंकि मुझे डर लगता है कि जैसे ही मैंने ऐसे किया बल्लेबाज आउट हो जाएगा। सचिन जब 190 तक पहुंचे थे तब तक मैं ड्रेसिंग रूम में अपनी सीट पर बैठा रहा था और एक बार भी ताली नहीं बजाई थी।
  • वर्ष 1983 के विश्व कप में जब भारतीय कप्तान कपिल देव जिम्बाब्वे के खिलाफ 175 रन की मैराथन पारी खेल रहे थे तब तत्कालीन टीम प्रबंधक ने सभी खिलाडिय़ों को साफ कह रखा था कि उनमें से कोई भी अपनी जगह से नहीं हिलेगा जब तक कपिल अपनी पारी पूरी नहीं कर लेते। इस दौरान कृष्णामाचारी श्रीकांत ने दो बार उठने की अनुमति मांगी लेकिन प्रबंधक ने कठोरता के साथ उन्हें उठने से मना कर दिया।
  • श्रीकांत खुद भी मैदान में उतरते समय सबसे पहले सूरज की तरफ देखा करते थे और हमेशा बायां पैड पहले बांधते थे। वह मैदान में जाते समय अपने जोड़ीदार के दायीं तरफ चलते थे।
  • महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर मैदान में उतरने से पहले अपने बल्ले को पहले मैदान में रखते थे और उसके बाद दायां पैर सबसे पहले रखते थे।
  • पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली बल्लेबाजी के समय अपनी जेब में अपने गुरु की तस्वीर रखा करते थे।
  • ऑस्ट्रेलिया की ट्वेंटी-20 टीम के कप्तान माइकल क्लार्क बल्लेबाजी के लिए मैदान में उतरने से पहले तेज संगीत सुनते हैं।
  • दिग्गज लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने कोटला मैदान पर जब पाकिस्तान के खिलाफ एक पारी में दस विकेट लेने के विश्वरिकॉर्ड की बराबरी की थी तो कुंबले के ओवर डालने से पहले सचिन उनका स्वेटर और कैप अंपायर को देते थे और कुंबले उस ओवर में विकेट चटकाते थे।
  • पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन अपने गले में एक ताबीज पहना करते थे और स्ट्राइक लेने से पहले अपना सिर दो बार घुमाते थे।
  • पाकिस्तान के दिग्गज ऑलराउंडर इमरान खान ने 1992 के विश्वकप फाइनल में एक विशेष टी शर्ट पहनी थी।
  • भारतीय टीम की दीवार राहुल द्रविड़ बल्लेबाजी के लिए उतरते समय हमेशा पहले अपना दायां पैर मैदान पर रखते हैं।
(अंधविश्वास पर तीसरी कडी में आगे पढिय़े बॉलीवुड के अंधविश्वासी महारथियों के बारे में)

1 comments:

Rahul said...

बढिया है। कुछ पत्थर हमें भी बता दो। ताकि माया नगरी में पैर जमे रहें।