March 17, 2017

तकनीक की दुनिया: कुशलता की कमी से जूझ रहा देश का डिजिटल मिशन

सचिन श्रीवास्तव
नामी गिरामी भारतीय कंपनियों के मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) डिजिटल तकनीक के सहारे देश की तकदीर और तस्वीर बदलने की तैयारी में हैं, लेकिन कुशल आईटी प्रतिभाओं की कमी इस सपने के आड़े आ रही है। गाहे-बगाहे यह सवाल सामने आता रहा है, लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने इसकी गंभीरता की ओर इशारा किया है। सूचना तकनीक से जुड़ी रिसर्च के लिए दुनियाभर में मशहूर गार्टनर के सालाना वैश्विक सर्वे में 65 भारतीय सीईओ से भी राय ली गई है और इनकी समस्या चिंतित करने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की विभिन्न कंपनियां अपने आईटी बजट में दुनिया भर के मुकाबले 5 गुना ज्यादा बढ़ोतरी करेंगी, लेकिन इससे भी उनकी समस्या कम नहीं होने वाली है।

5 गुना ज्यादा बढ़ोतरी आईटी बजट में
भारतीय कंपनियां इस साल अपने आईटी बजट में औसतन 10.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेंगी। यह दुनिया की औसत बढ़ोतरी से करीब पांच गुना ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक आईटी बजट की वैश्विक वृद्धि 2.2 प्रतिशत होगी।

प्रतिभाओं की बेहद कमी
रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम के सदस्य और गार्टनर के वाइस प्रेसिडेंट पार्थ अयंगर के मुताबिक, भारत वैश्विक पटल पर तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है और ऐसे में भारतीय सीईओ चाहते हैं कि उनके सीआईओ डिजिटलाइजेशन के वायदे को पूरा करें। दिक्कत यह है कि अपने सपने को साकार करने के लिए सीआईओ पैसा भी खूब खर्च कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने काम के लिए सटीक प्रोफेशनल्स नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण से कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अधूरे हैं।
21 प्रतिशत सीआईओ की चिंता स्किल और रिसोर्स
35 प्रतिशत कर्मचारियों में बिजनेस एनालिटिक्स की समझ न होने से परेशान

2598 सीआईओ की राय के आधार पर निकाले गए वैश्विक निष्कर्ष
93 देशों के सभी मुख्य क्षेत्रों के प्रमुख सूचना अधिकारियों से की गई बातचीत
630 लाख अरब रुपए का कुल राजस्व है सर्वे में शामिल कंपनियों का
20 अरब रुपए से ज्यादा खर्च करती हैं यह कंपनियां अपने आईटी बजट पर

बदलाव के रास्ते में चुनौतियां कम नहीं
भारतीय सीआईओ को जो पैसा मुहैया कराया जा रहा है, वह डिजिटलाइजेशन के जरिये बाजार को पूरी तरह बदल देने वाली तकनीक के लिए है। जाहिर है भारतीय बाजार में आया बदलाव वैश्विक माहौल को भी प्रभावित करेगा। ऐसे में सपना बड़ा है, चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
पहली चुनौती: परंपरागत तकनीक पर खर्च
भारतीय सीआईओ डिजिटलाइजेशन के लिए सबसे ज्यादा खर्च परंपरागत तकनीक पर कर रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं, डाटा सेंटर्स, सूचना की सुरक्षा और नेटवर्किंग उनकी प्राथमिकता में नहीं है। यहां तक कि शीर्ष कंपनियों में भी यही हालात हैं। इस वजह से भी डिजिटलाइजेशन में दिक्कतें आ रही हैं।
दूसरी चुनौती: संसाधन की कमी
प्रतिभाशाली कर्मचारियों की कमी एक बड़ी वजह है, जो अच्छे कामगारों के विदेश जाने से पैदा हुई है। इसके अलावा अन्य संसाधनों की भी कमी है। इसमें ढांचागत विकास, सुविधा और माहौल शामिल है।
तीसरी चुनौती: प्लान बी नहीं
ज्यादातर कंपनियां अपने डिजिटलाइजेशन के लिए प्लान बी नहीं तैयार कर रही हैं, जो मौजूदा माहौल में पिछडऩे की बड़ी वजह है।
चौथी चुनौती:
अपरिपक्व कंपनियां

भारतीय कंपनियां बजट और योजना तो बना रही हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजनाएं अपरिपक्व हैं। बाजार में अभी के हालात पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है, जो बदलते देर नहीं लगती। ऐसे में योजनाओं का पिछडऩा बड़ी बात नहीं।

फिर भी उम्मीद है कायम
चुनौतियों के बावजूद रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि भारतीय सीआईओ समस्याओं से कैसे और कितनी जल्दी निपटेंगे, इससे ही आने वाले दिनों की तस्वीर बदलेगी। भारतीय कंपनियों और देश के डिजिटलाइजेशन का सपना सीआईओ की सफलता और असफलता पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है।

तीन गुना ज्यादा विस्तार
रिपोर्ट में भारतीय कंपनियों के कारोबार में विस्तार पर भी टिप्पणी की गई है। अनुमान लगाया गया है कि 2017 में सीईओ की मानें तो उनकी कंपनियां औसतन 12.6 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करेंगी, जो वैश्विक वृद्धि दर 4 प्रतिशत से तीन गुना ज्यादा है।

कम लागत और नवाचार को तरजीह
10 में से 9 भारतीय सीआईओ के मुताबिक, डिजिटल बिजनेस प्रोजेक्ट की लागत बेहद कम कर देता है, जबकि 80 प्रतिशत कंपनी के रोजमर्रा के काम में नवाचार के लिए डिजिटल तकनीक के हिमायती हैं। सीआईओ 2018 तक कंपनी के कुल आईटी बजट का 35 प्रतिशत हिस्सा डिजिटलाइजेशन पर खर्च करने की तैयारी में हैं। शीर्ष कंपनियों की बात करें तो वे अगले दो साल में अपने आईटी बजट का 43 प्रतिशत हिस्सा डिजिटलाइजेशन पर खर्च करने वाली हैं।

प्राथमिकता में डिजिटलाइजेशन
37 प्रतिशत भारतीय सीआईओ डिजिटलाइजेशन को सबसे पहले तरजीह देते हैं
28 प्रतिशत शीर्ष कंपनियों के सीआईओ मानते हैं पहली जरूरत
21 प्रतिशत वैश्विक सीआईओ की लिस्ट में डिजिटलाइजेशन है पहले स्थान पर

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