एक शब्द का प्रिय होना
एक अपील भरोसेमंद
मकान जो कहीं नहीं है
अधूरी कविता जिसे पूरा नहीं होना---- कभी भी
ये तो डिलीट हो लिए..
"मस्तराम" नहीं रहे
वहां बदलाव की लय सुनी जा सकती है
क्या ब्लॉगवाणी भी चला नारद की राह
आज बस इतना ही
मोहल्ले और भडास की असली औकात या यूं कहें कि "ताकत"