June 12, 2007

जाकी रही भावना जैसी......

पिछले दो दिनों में बहुतों ने कई तरीके से गरियाया है । भडास प्रकरण के कारण कुछ दोस्तियाँ टूटते टूटते बनीं तो कुछ टूट ही गईं । खैर, गम किसी बात का होता नहीं हमे, इश्क में सीखा है हंसकर छुपा लेना दर्द । कुछ दोस्त गए हैं तो जाहिर है कि नए आएंगे । वैसे भी मेरा दिल बहुत छोटा है । सबके लिए जगह कहॉ है . इतना छोटा कि पिछले तीन साल से एक ही लडकी के इश्क में बुरी तरह गिरफ्तार हूँ । कभी भी नौकरी छोड़ देता हूँ । जिसे भाई लोग मेरा मानसिक दीवालियापन कहते हैं . हाँ दोस्तो में हूँ ही दीवाना - लोग सुनते रहे दिमागों की, हम चले दिल को रहनुमा करके के अंदाज़ में अब तक गुज़ारे जीवन को अक्ल वाले यही तो कहेंगे । यूँ भी में मानता हूँ कि - अक्ल की बातें करने वाले, क्या समझेंगे दिल की धड़कन । हमारे बुजुर्गों ने तो यही बताया है कि - प्यार करना और जीना उन्हें कभी नहीं आएगा, जिन्हे ज़िन्दगी ने बनिया बना दिया है । सुन रहे हो दिल्ली वालो !!!!!!!!!!!!!!!

1 comments:

Divine India said...

सच कहा भाई…
लगे रहो…।