February 25, 2010

पहला नहीं, वनडे क्रिकेट का दूसरा दोहरा शतक है ये

सचिन के 200 रन को वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक घोषित करने वाली मर्द मानसिकता को सलाम। दोस्तो हम क्यों महिला क्रिकेट को भूल जाते हैं। याद कीजिए बैलिंडा क्लार्क की पारी। बात एक दशक पुरानी है, सो शायद भुलक्कड उत्साही क्रिकेट दीवाने उस पर गर्द डा चुके हैं। सचिन तेंदुलकर के गृहनगर मुंबई में बैलिंडा ने 155 गेंद में नाबाद 229 रन बनाए थे। डेनमार्क के खिलाफ 16 दिसंबर 1997 को। डेनमार्क को 49 रन पर ऑलआउट कर ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 363 रन से जीता था। मैच में बैलिंडा ने पारी की शुरुआत की थी और इस तूफानी पारी में उन्होंने 22 चौके लगाए थे।

यह महिला क्रिकेट इतिहास का महज 256वां वनडे था। आप कह सकते हैं कि डेनमार्क जैसे आसान गेंदबाजी आक्रमण के सामने बनाए गये बैलिंडा के इस दोहरे शतक से कहीं ज्यादा मुश्किल और खूबसूरत पारी सचिन ने खेली, लेकिन यहां सचिन की महानता और उनकी क्रिकेटीय खूबसूरती नहीं बल्कि उस मानसिकता की ओर मैं इशारा करने की कोशिश कर रहा हूं जो पुरुष क्रिकेट के भगवान और अन्य देवताओं के आगे बाकी सारी मानवीय उपलब्धियों को फीका समझती है। हालांकि यह बात भी सच है कि अगर गेंदबाजी आक्रमण की कमजोरी ही बडी पारियों का आधार होती तो अब तक बांग्लादेश, कीनिया, हालैंड, नाइजीरिया आदि के खिलाफ दोहरा शतक लग चुका होता। और फिर सचिन ने द अफ्रीका जैसे आक्रमण के खिलाफ यह सर्वकालिक महान पारी खेली है। बस बात इतनी ही कि क्यों नहीं बैलिंडा की पारी का जिक्र तक किया जा रहा इस उपलब्धि के साथ।

सचिन
महान हैं, बडे क्रिकेटर हैं, लेकिन उनके बारे में बात करते हुए भावना के बजाए तथ्यों को ध्या में रखें। बहुत बहुत बधाई सचिन। मुझे आप पर गर्व है, हर हिंदुस्तानी और क्रिकेटप्रेमी की तरह।

15 comments:

हृदय पुष्प said...

विशेष जानकारी धन्यवाद्

साहिल said...

sachmuch, kisi bhi uplabdhi ko bhi lingbhed se taulne me bhartiyon ki leela aparampaar hai.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

mujhe to maalum thi yah jaankaari..aour aapko bhi pataa he..yaani is desh ke ham jese bhi kaafi honge hi../ par jo beet gai so baat gai.., yah to manaa hi jaanaa chahiye ki mahila aour purush cricket dono alag alag he.sachin ki baat purush cricket ke maddenazar likhi jaa rahi he aour aankado me bhi purush cricket ka hi itihaas he..kher..

सचिन .......... said...

अमिताभ भाई बात तो सही है कि पुरुष क्रिकेट की बात की जा रही हैं, असल झुंझलाहट तो यही है। पुरुष क्रिकेट के रिकार्ड को वनडे क्रिकेट का, सीमित ओवर के इतिहास का पहला दोहरा शतक बताना एक तथ्यात्मक भूल है, जिसका नरा हमारे मीडिया की पुरुष ग्रंथि में गडा है। ढाई हजार से ज्यादा वनडे खेलने के बाद यह दोहरा शतक बना, लेकिन देखिए महिलाओं ने बिना सुविधाओं के महज 256वे वनडे में यह उपलब्धि हासिल कर ली। क्या बैलिंडा के दोहरे शतक पर ऐसी हाय तौबा मची। माफ करें सचिन तेंदुलकर जी, लेकिन सच मानिए इस महान बल्लेबाज से हमारा मीडिया तकरीबन आक्रांत है। कुछ और बेचने लायक मिलता ही नहीं।

कुमार क्षितिज said...

sahi kaha sachin bhai. media ne jis kism kee jaldbaazi dikhaii vo akshamay hai. aankdebaaz jara sa dherya rakhte to dekh paate ki belinda kee uplabdhi kitni mahatvapoorn hai

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बेलिंडा क्लार्क के इस रिकार्ड का स्मरण कराने के लिए आभार!

Udan Tashtari said...

आभार इस जानकारी के लिए.

सुजाता said...

काफी हद तक सहमत !

विनीत कुमार said...

जानकारीपरक।..शुक्रिया

अनूप शुक्ल said...

ये तो अपन को पता ही नहीं था। वाह्!

लवली कुमारी said...

इस जानकारी के लिए शुक्रिया.

venus kesari said...

YE TO MERE LIYE NAI JAANKAAREE HAI

boletobindas said...

हां भाई ये तो सही में ही बहुत बड़ी गलती है....

Archana said...

Hame bhi pata nahi tha ...janakari ke lie dhanyawad ..shayad SACHIN ko bhi pata na ho ..........waise SACHIN ko is uplabdhi par badhai...

ओम पुरोहित'कागद' said...

lekhak shayad ye jante hon ki maihla or purush alag alag crcket hai or dono ke alag alag record rakhe or bataye jate hain.sachin ksa record purush cricket me hai or advitiy hai.