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Showing posts from June, 2011

उम्मीद के मुहाने पर मुश्किलों से घिरी जिला पत्रकारिता

दोस्तो,
इससे पहले कि मैं अपने पत्रकारीय अनुभवों और उनसे बनी स्थापनाओं को आपके सामने रखूं, उसके पहले मुझे साफ कर देना चाहिए कि मैं कोई विशेष, उल्लेखनीय, अलग या चैंका देने वाली बात नहीं कहने जा रहा। शायद कोई अच्छी और आपके विचारों को बेहतर दिशा देने वाली बात भी नहीं करूंगा। जो लोग वाकिफ हैं, वे जानते हैं कि तरतीब की मुझमें कमी है, सो कुछ बेतरतीब बातें।
जिला पत्रकारिता पर बात करते हुए हम मानकर चलते हैं कि दुनिया खराब है, बद से बदतर होती चली जा रही है। इंसान में से इंसानियत का हिस्सा या तो कम हो रहा है, और वह ज्यादा से ज्यादा हिंसक, उजड्ड और प्रतिक्रियावादी होता जा रहा है। यह दुनिया हमें मिली है, और इसी में हमें रहना है। इससे पहले यह कुछ बेहतर थी, आगे और बदतर होगी। ठीक पत्रकारिता की तरह। क्या पत्रकारिता, जिंदगी के मुहावरे के इतने ही नजदीक है। शायद हां। हमसे पहले कुछ ठीक दौर था, इससे पहले और भी अच्छा और शायद इसके बाद बेहद बुरा वक्त आने के लिए छटपटा रहा है।
मगर क्या सचमुच ऐसा ही है। मुझे इसके ठीक उलट भी उतना ही सच लगता है। यानी यह दुनिया और साथ साथ पत्रकारिता में हालात पहले बदतर थे, फिर बेहतर ह…

एक ‘‘भारतीय कलाकार’’ के न रहने का सूनापन

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भारतीय कला को विश्व पटल पर मजबूती देने वाले चित्रकार थे मकबूल फिदा हुसैन
हुसैन की याद आते ही उनके साथ जुड़े विवाद चले आते हैं। ये विवाद क्यों हुए! उनके पीछे कौन था! क्या हुसैन को विवादों के बीच रहना अच्छा लगता था! ऐसे सभी प्रश्नों पर यह एक तथ्य भारी पड़ता है कि मकबूल फिदा हुसैन ने भारतीय कला जगत को नया आयाम दिया। वे हमारे समय के ऐसे कलाकार थे, जिसकी दृष्टि बेहद साफ थी। कला और समाज के रिश्तों से बेहद गहराई से वाकिफ हुसैन की पेंटिंग, समझ और दृष्टि उन्हें दूसरे चित्रकारों से कतार में आगे खड़ा करती है।

युवा चित्रकार मुकेश बिजौले हुसैन के बारे में बात करते हुए भावुक हो जाते हैं। रुंधे गले से वे बताते हैं, ‘‘उनका रचना संसार इतना व्यापक था कि इसमें सूक्ष्म से सूक्ष्य चीजें भी दिखाई देती हैं।’’ हुसैन की कई खासियतों का जिक्र करते हुए मुकेश कहते हैं, ‘‘वे कैनवास पर सबसे पहले एक ब्लैक बोल्ड लाइन खींचते थे, और उसके इर्द-गिर्द एक आकृति उकेरते थे। उनकी इसी ब्लैक लाइन में पूरी पेंटिंग का इतिहास छुपा होता था। इसे हम पेंटिंग की लाइफ लाइन भी कह सकते हैं।’’

पेंटिंग को जीवन देने का यह रहस्यलोक हुसैन के साथ ही …