June 24, 2007

कार्टून और हंसी

पिछले दिनों राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भारतीय मीडिया को सलाह दी थी कि कार्टून को अख़बारों के पहले पेज पर वापस लाया जाना चाहिए क्योंकि इससे लोगों को सुबह मुस्कुराने का मौक़ा मिलता है । साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अख़बार के पहले पन्ने पर राजनीति की ख़बरों को कम किया जाना चाहिए । निजी तौर पर में राजनीति को पहले पन्ने पर देने के साथ ही इस बात का भी समर्थक हूँ कि क्यों पाठक के सामने देश की हंसती मुस्कुराती तस्वीर रखी जाये जो जैसा है वैसा दिखे की तर्ज़ पर कालिख क्यों ना सुबह सुबह आपके दिन को तय करे । साथ ही में यह भी मानता हूँ कि कार्टून को देखने से हंसी नहीं बल्कि अफ़सोस ही होता है हमारे समय की विदुर्प्ताओं पर जिसे हम हंसकर टाल देते हैं । यकीन नहीं होता तो नीचे दिए कार्टून पर नज़र डालिये ......


राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से संबंधित पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां दॊ बार टुनकी मारें

1 comments:

Manish said...

पहले अखबारों मे ऐसा अक्सर होता था। कम से कम टाइम्स अफ इंडिया व हिन्दुस्तान टाइम्स का ख्याल तो मुझे आता है जहाँ पहले पृध्ठ पर लक्ष्मण और सुधीर तैलंग के कार्टून आया करते थे ।