October 11, 2008

सुबह तक चांद से बातें करते हुए

उसके कुछ दोस्तों और करीबियों ने प्रेम किया/ और उसने भी किया किताबी नहीं हकीकत का प्रेम किया/ उसकी आंखों में सपने तो तैरते ही थे/ इनमें एक और सपना साथ साथ तैरने लगा/ वह उन दोस्तों के प्रेम के रंगों को देखकर चमत्कृत होता/ फिर अपने प्रेम को देखता/ धीरे धीरे उसके दोस्तों के प्रेम सफल होते गए/ वह अकेला खडा देखता रहा प्रेम की मंजिलों को थमते कदमों के साथ/ सुखी संसारों के घटाटोप मेंवह मनमौज पर सवार एक हिरन की सवारी करता हर रात/ और सुबह तक चांद से बातें करते हुए अपने
प्रेम के छूट जाने की कल्पना पर सिहर उठता/ वह बार बार पहुंचा उन दोस्तों के संसार में जिनके प्रेम सफल हुए थे/ उन्होंने आत्मीयता दिखाई/ उसे समझाया/ उसे बताया/ पुचकारा/ फिर संवारा/ वह धीरे धीरे अपने प्रेम के अकेलेपन से बाहर आने लगा.
जिंदगी की लंबाई उसे कचोटती थी बहुत पहले से उसे जिंदगी को बीच में से मोड लिया/ अब वह अपनी ही जिंदगी को एक साथ दोहरा करके जीने लगा/ इस तरह उसे लगता था वक्त जल्दी कट जाएगा/ वह स्वार्थी था और अव्वल दर्जे का स्वार्थी था/ जिंदगी का पूरा का पूरा हिस्सा किसी को देना नहीं चाहता था/ और खुद उसे जीना आ नहीं रहा था/ वह अपनी सांसों की कीमत पर सिर्फ अपना हक जताते हुए भूलने लगा था/ कि मां ने कितनी रातें उसके लिए आंखों में काटी/ पिता ने कितनी सडकों की खाक छानी/ बहन ने कितनी बलाएं टाली/ और भाई ने कितने दुखों को खुद पर झेला/ वह दिल्ली में था, वह कल्कत्ता में था/ वह घाटमपुर में था/ वह हिरौली में था/ वह वहीं नहीं था जहां उसे होना चाहिए था/ वह उन सभी जगहों पर था जहां उसके अलावा सबको होना चाहिए था.

4 comments:

BrijmohanShrivastava said...

अन्तिम दो लाइन में सार निचोड़ कर रख किया भाई /वह वहाँ था जहाँ उसे नहीं होना चाहिए था और वह वहां न था जहाँ उसे होना चाहिए था -बहुत सुंदर /माँ बाप बहिन भाई का दुःख ये आज कल के लड़के [[बैसे आज कल के तुम भी हो बुरा मत मानना भाई क्योंकि हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते है लोग और रो रो के बात करने की आदत नहीं मुझे }} समझ पाते

Tara Chandra Gupta "MEDIA GURU" said...

bahut sundar rachana. bahut bahut badhai.

कुमार आशीष said...

शतक पूरा करने हेतु बधाई।

CRY के दोस्त said...

isme ek paresaani hai,
kuch hee dino me sabke pate aur deekane badal jayege,
ham sab ek jagah ke jo bhopal me tha bo dellhi me hoga, aur jo delhi me tha ranchi me
mumbai wala indore aur
ludhiyana wala indore mai hoga
kuch to padte padte hee apna dikaanaa badal denge.

sukr hai, jaise ki tum
agli baar padna aur chaho to jagah edit kar dena
chaho to mat karna
kyoki woh phir wapis aa sakte hai