February 22, 2009

माफी : एक कविता के बहाने

मैं कविताएं नहीं लिखता इसलिए कवि भी नहीं हूं. लेकिन तब क्या किया जाए जब कोई कविता आसपास घुमडती रहे. लगातार. जिद करती हुई कि मुझे लिखो. यह अक्सर होता है. दिमाग पर सवार ऐसी कविताएं लगातार दूसरे कामों को टालने की जिद करती हैं और दिलचस्प है कि कई बार तो वे वक्त भी बतातीं हैं उन्हें लिखने का. जिसे हम सुविधानुसार खाली समय या फिर रचनात्मक समय का नाम दे सकते हैं. मुझे तो यह लगता है कि कोई कवि भी कविता लिखना नहीं चाहता. वह गप्पें मारना चाहता है, लोगों की तकलीफें देखकर बेहद उदास नजरों से अपने वक्त को ताकना चाहता होगा या फिर बेहद छोटी छोटी खुशियों के साथ थोडा वक्त गुजारकर अपनी हंसी को उंडेल देता होगा, कवि. कविता लिखना तो उसकी जरूरत भी नहीं है, जो कवि है. कविता तो हर वक्त ढूंढती है कि कोई उसे लिख दे तो चैन मिले भटकन से. मेरी बात से आप सहमत या असहमत हो सकते हैं, लेकिन अभी अभी बहुत दूर चक्कर काट रही है वह कविता कभी आपके सामने आ गई तो क्या करेंगे? उसे लिखे बिना काम नहीं चलेगा जैसे बीते तीन हफ्तों ने इस कविता ने मेरी नाक में दम किया हुआ था. इसे लिखकर कुछ सुकून मिला है. तब तक के लिए जब तक कि कोई और कविता सिर पर सवार नहीं होती.
माफी
हमें माफी मांगनी थी
अपने दोस्तों से
जिन्होंने जिंदगी के सपाट रास्तों पर
बिछकर गुजारीं
खुशियों की जगमग दोपहरें
जिन्होंने जतन से टांके लगाये
दुखों के फटे चिथडों पर

हम सचमुच माफी चाहते थे
गहरी नींद में
भविष्य की बुनावट के रेशे तलाशते दोस्तों से
हम जिन्होंने
उम्र की पगडंडी पर कभी तेज दौड लगाई
कभी बेकार सुस्ती में अलमस्त जमाई ली
और कभी खुशियों का गट्ठर उछाल दिया
तारों की ओर

हम माफी के हकदार नहीं थे
और हमें माफी चाहिए थी
दोस्तों से
बिना झिझक और शर्मिंदगी के
आंखों में आंखें डालकर माफी चाहते थे हम
जीवन की नयी लय तलाशने की सजा मुकर्रर होने के ठीक पहले

7 comments:

रवीन्द्र प्रभात said...

सुंदर अभिव्यक्ति ,अच्छा लगा पढ़कर !

शोभा said...

कवि नहीं हैं पर कविता तो बढ़िया लिखी है। ः)

प्रशांत मलिक said...

bahut achhi kavita likhi hai...

Udan Tashtari said...

ये कब से हुआ कि हमारे सचिन हम से कहने लगे कि हम कवि नहीं हैं..महाराज!! तबीयत तो दुरुस्त है न!!

अरे, तुम्हारी देखादेखी तो हम लिख लेते हैं हल्का फुल्का..काहे मन तोड़ते हो हमारा.

बहुत बेहतरीन गहन भाव लिए कविता रच गये, महाराज!! जय हो..चीयर्स के साथ. :)

साहिल said...

"kavita to har waqt dhoondhti hai ki koi use likh de to chain mile bhatkan se"...

Kavita se Zyada behtar hai.
Badhai..

neelima sukhija arora said...

कविता को हर वक्त ढूंढती है कि कोई उसे लिख दे, तो चैन मिले भटकन से

नदीम अख़्तर said...

मैं बता दूं कि स‌चिन भाई न स‌िर्फ अच्छे कवि हैं, बल्कि ये तो करोड़ों में एक इंसान हैं। वो कहावत है ना कि जिस पेड़ में जितना फल लद जाता है, वह पेड़ उतना ही झुक जाता है, वही हाल है स‌चिन भाई का।