May 5, 2009

मेरे पास माफी नहीं है

आज एक दोस्त ने कहा- माफी मांगता हूं यार. मैं शर्मिंदा हुआ. मेरे पास माफी नहीं थी. जाहिर तौर पर मैंने बुझे स्वर में उससे कहा- मैं नहीं दे सकता. वह बुरा मान गया. असल में सचमुच मेरे पास माफी नहीं है. मैं खर्च कर चुका हूं अपनी सारी माफियां. अपने हिस्से की सारी माफियां लोगों को दे दीं. मैंने सिगरेट चुराने वाले दोस्त को माफी दे दी, जिसने भटकने के लिए छोड दिया सडको पर उसे भी माफ कर दिया. वो जो हर रोज मेरी नोटबुक का पन्ना फाडता था उसे भी माफी देनी पडी. सबसे हंसौड साथी था वह. ऐसे कई हैं. गिनाकर उन्हें छोटा नहीं करना चाहता. पर उदाहरण हैं कि कहां खर्च कर दीं. हालांकि हिसाब नहीं है. जब माफियां थीं. दिल बडा था. गोदाम की तरह. किसी को भी माफ कर देते थे. सोचा ही नहीं कि बाज वक्त में माफी देने की जरूरत पडेगी तो कहां से लाएंगे.

आप कह रहे होंगे कि मांग लो किसी से. कैसे मांग लें? उसने पता नहीं किस जरूरत के लिए रखी हो बचाकर. आपको दे दे. यार माफी भी कोई मांगने की चीज है. दोस्तों की तरफ देखता हूं. तो लगता है वे भी माफी मांग रहे हैं. सच बताउं तो ये पहली बार नहीं है जब माफ करने की जरूरत पडी है. मैं कब से माफी देना चाहता हूं, है ही नहीं सब खत्म हो गई. आडवाणी को माफ नहीं कर पा रहा, बाबरी के लिए. मोदी को गुजरात के लिए, उमा भारती को भी नहीं कर पाया धार के लिए, ये इधर ही शिवराज सिंह है, दिग्विजय सिंह है, वो किसी रियासत का 'राजकुमार' है, ज्योदिरादित्य. इन सबको कहां से और कैसे माफ कर दूं. मनमोहन सिंह है, बडे पटेल हैं, अनिल अंबानी और जमशेदपुर को बूचडखाना बनाने वाले टाटा. उधर अमेरिका में बैठा जार्ज बुश है, चर्चिल भी. माफ तो मुलायम सिंह को भी करना है, अमिताभ बच्चन को माफ करना है. नवजोत सिंह सिददू को माफी देनी है.... कई सारी माफियां चाहिए. इतनी सारी माफी कहां से लाउं.. फिर सोचता हूं इन्हें माफ कर देने भर से क्या होगा. इन सबको माफ करने का जुगाड कर भी लिया, तो ये वरुण गांधी को करने के लिए चाहिए होगी, कोई और सिंह, शर्मा, सिन्हा, झा होगा, जो तैयारी कर रहा होगा, दुनिया को बदसूरत बनाने की.

नहीं माफ करने से काम नहीं चलेगा. अब नहीं दूंगा माफी. है ही नहीं. होती तब भी नहीं देता. तुम भी मुझे माफ मत करना. सारी माफियां बहा दो अरब सागर में. दिल बडा है तो क्या सबको माफ ही करते रहें? इस दुनिया को प्रेम करने के लिए है ये दिल बडा, या इन मनुओं को माफ करने के लिए? तुम जो आज पैदा हुए हो मार्क्स, तुम ही बताओ कल को हिटलर आ गया तो क्या उसे भी माफी दे देंगे हम सब?

12 comments:

अशोक कुमार पाण्डेय said...

इन्हे माफ़ करेंगें तो इतिहास हमे कभी माफ़ नही करेगा साथी

Udai Singh said...

चे भाई जान किसी को माफ करना या फिर न करना आप का जन्मसिद्ध अधिकार है लेकिन इन सभी मनु के औलादों को माफ करोगे तो तुम्हे सुकून की नीद नहीं आएगी इन्हे माफ करना महज दिमागी खुराफात है डटे रहो कभी मत माफ करना

Syed Akbar said...

वाह साहब, भोपाल से जुडी आपकी सारी पोस्ट एक सांस में पढ़ गया. भोपाल से अपना लगाव कुछ खास वजह से है. अच्छा लगा आप आपके ब्लॉग पर आकर.
शुक्रिया.

अनिल कान्त : said...

bilkul sahi kaha dost
katayi nahi

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Udan Tashtari said...

हिटलर के कारनामे तो आजकल की जा रही कारगुजारियों के सामने कुछ भी नहीं..माफ कर देना भई..जब इन्हें किया तो.

-बेहतरीन आलेख.

Bhuwan said...

लिस्ट और भी लम्बी हो जायेगी जनाब.. इनको माफ़ करने से बेहतर है खुद को माफ़ किया जाये.

श्यामल सुमन said...

सुन्दर प्रवाह एवं प्रस्तुति।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

ruby said...

jo v bachi khuchi mafi hai vh kam se km inhe dene k liye to nahi hi hai...

Ajit said...

हाँ, भई तो आजकल तुमने माफ़ करना छोड़ दिया है। अच्छी बात है, लेकिन ये बताओ कि जिन्हे तुम माफ़ करने की बात कर रहे हो, क्या वाकई उन लोगों को किसी माफ़ी की ज़रूरत है? क्या वो इसका कोई सनद रखते हैं कि कोई उन्हे माफ़ कर रहा है या नहीं? उनकी नज़र में उन्होने कोई ग़लत काम किया ही नहीं है तो फ़िर मुआफ़ी किस बात की..! असल में तुम्हे तो अब सजा देने की बात करनी पड़ेगी, तुम तो ये बताओ कि इनके लिए तुमने क्या सजा मुकर्रर की है..?
और दूसरी बात, आज कोई मनु नहीं है, कोई बाबर नहीं है, कोई मार्क्स नहीं है, कोई हिटलर नहीं है, आज तुम हो, मैं हूँ और हमारी शक्ल-ओ-सूरत वाले कई और लोग भी हैं, जिन्हे उनके नाम और काम से पहचानने की ज़्यादा ज़रूरत है न कि उन्हे पुराने और किसी दूसरे मकसद के लिए बनाए गए खेमों के साथ जोड़ कर देखने की।

neelima sukhija arora said...

वाकई इनके लिए सिर्फ हमारे पास तो क्या किसी के पास भी माफी नहीं हो सकती।

रंजीत said...

Ab bach ke Rahna maafee deno walon ke bhuton se... unhone kitne jatan se is desh me maafi kee sanskritee ropee thee aur tum ho kee sire se unke khet char jana chahte ho.Aur bhaee, Bharat ko soft desh banaye Rakhne ke liye jo pure Globe ke thekedar log naye-naye Gandhiwaadee ban rahe hain aur tamam Gandhiwad sirf Bhartoiyon ke liye aniwarya mante hain , unko bhee teree yah pratigyan raas nahin aayegee.
Waise main bhee tumhen kabhee maaf nahin karne wala...
Very nice writting yaar...
Ranjit

रवीन्द्र रंजन said...

चलिए अब गुस्सा थूक भी दीजिए। एक बार फिर सबको माफ कर दीजिए।